बांग्लादेश में फिर 'बेगमों' की जंग, खालिदा जिया की मौत के बाद जो आरोप लगे, उसने दुनिया को चौंका दिया

Post

News India Live, Digital Desk : पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजनीति को करीब से जानने वाले जानते हैं कि वहाँ की सत्ता दो ताकतवर महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती रही है शेख हसीना और खालिदा जिया। लेकिन अब, खालिदा जिया की मौत के बाद वहां के हालात एक नए और काफी संजीदा मोड़ पर आ खड़े हुए हैं। खालिदा जिया की पार्टी यानी BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) ने जो आरोप लगाए हैं, उसने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

BNP का गुस्सा और शेख हसीना पर निशाना

खालिदा जिया लंबे समय से बीमार चल रही थीं और उन्हें कई बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। लेकिन उनकी मौत के बाद उनकी पार्टी ने सीधा उंगली उठाई है पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पर। पार्टी के नेताओं का कहना है कि खालिदा जिया के साथ जो कुछ हुआ, वह केवल उम्र का तकाजा या बीमारी नहीं थी, बल्कि उसके पीछे एक सोची-समझी राजनीति थी।

पार्टी का सीधा आरोप है कि शेख हसीना की सरकार ने खालिदा जिया को वो इलाज नहीं मिलने दिया, जिसकी उन्हें सख्त जरूरत थी। वे अक्सर उन्हें बेहतर इलाज के लिए विदेश ले जाने की मांग करते रहे, लेकिन सरकार ने कानूनी अड़चनों का हवाला देकर उन्हें घर या देश के भीतर ही इलाज तक सीमित रखा।

क्या ये केवल राजनीति है या कुछ और?

किसी भी देश में जब एक बड़े नेता का निधन होता है, तो भावनाएं चरम पर होती हैं। बांग्लादेश में यह विवाद और भी गहरा इसलिए है क्योंकि वहाँ की राजनीति में बदला और विरोध काफी तीखा रहा है। BNP के समर्थकों का मानना है कि उनकी नेता को तिल-तिल कर खत्म किया गया। दूसरी तरफ, जब शेख हसीना सत्ता में थीं, तो उनकी सरकार हमेशा इन बातों को 'अफवाह' या 'सियासी स्टंट' ही मानती रही।

आज के बांग्लादेश का बदला हुआ रुख

ध्यान देने वाली बात ये है कि आज के वक्त में जब शेख हसीना खुद बांग्लादेश की सत्ता से बाहर हैं और हालात काफी बदल चुके हैं, तब ऐसे आरोपों का और भी गहरा असर हो रहा है। आम लोग भी अब सवाल कर रहे हैं कि क्या राजनीति में प्रतिद्वंद्विता इतनी गहरी हो सकती है कि इंसानियत को भी पीछे छोड़ दिया जाए?

खालिदा जिया की विदाई बांग्लादेश की राजनीति का एक युग खत्म होने जैसा है, लेकिन उनके पीछे छोड़ गए ये सवाल शायद लंबे समय तक पीछा नहीं छोड़ेंगे। न्याय क्या है और सच क्या, इसका फैसला शायद आने वाले वक्त में वहाँ की अदालतें और जनता ही कर पाएगी।