कर्नाटक में कुर्सी की जंग हुई तेज सिद्धारमैया कैंप के विधायक चले ऑस्ट्रेलिया, डीके शिवकुमार की बढ़ी टेंशन

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News India Live, Digital Desk : कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अंदरूनी कलह ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। एक तरफ जहां उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दिल्ली में आलाकमान के सामने अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले करीब 22-25 विधायकों का एक जत्था ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा पर रवाना हो रहा है।

क्या है पूरा विवाद?

राजनीतिक गलियारों में इस विदेशी दौरे को 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' के अगले स्तर के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सिद्धारमैया खेमा अपने विधायकों को एकजुट रखने और डीके शिवकुमार के संभावित 'ऑपरेशन' से बचाने के लिए उन्हें विदेश भेज रहा है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे पशुपालन विभाग का एक 'स्टडी टूर' (अध्ययन दौरा) बताया जा रहा है, जिसका उद्देश्य ऑस्ट्रेलिया में डेयरी और पशुपालन की तकनीकों को समझना है।

विपक्ष का हमला और सरकारी सफाई

बीजेपी ने इस दौरे को जनता के पैसे की बर्बादी और 'फॉरेन जंकेट' करार दिया है। विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया कि जब राज्य की जनता महंगाई से जूझ रही है, तब सत्ताधारी दल के विधायक मौज-मस्ती के लिए विदेश जा रहे हैं।

विवाद बढ़ता देख मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सफाई देते हुए कहा, "अगर विधायक अपने निजी खर्च पर विदेश जा रहे हैं, तो हम उन्हें कैसे रोक सकते हैं? इसमें सरकार का कोई पैसा नहीं लगा है।" वहीं, पशुपालन मंत्री के. वेंकटेश ने पहले इस दौरे का नेतृत्व करने की बात कही थी, लेकिन विवाद के बाद उन्होंने खुद को इससे अलग कर लिया है।

डीके शिवकुमार का रुख

सूत्रों के मुताबिक, डीके शिवकुमार खेमे ने इस दौरे से दूरी बना ली है। चर्चा है कि शिवकुमार समर्थकों को आलाकमान की नाराजगी का डर दिखाकर इस दौरे में शामिल होने से रोका गया है। शिवकुमार फिलहाल दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं, जहां वह 2023 के चुनाव के बाद हुए कथित 'पावर शेयरिंग एग्रीमेंट' (ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री का समझौता) को लागू करने की मांग कर रहे हैं।

मुख्य बिंदु:

दौरे की अवधि: 18 फरवरी से 3 मार्च तक।

विधायकों की संख्या: शुरुआत में 35 विधायकों के जाने की चर्चा थी, लेकिन अब संख्या घटकर 20-22 रह गई है।

मकसद: कागजों पर 'पशुपालन अध्ययन', लेकिन सियासी गलियारों में इसे 'शक्ति प्रदर्शन' माना जा रहा है।

समय: बजट सत्र से ठीक पहले विधायकों का विदेश जाना राज्य की राजनीति में बड़े फेरबदल की ओर इशारा कर रहा है।

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