कांग्रेस में मचे घमासान के बीच मणिशंकर अय्यर का बड़ा बयान, क्या राहुल गांधी बचा पाएंगे डूबती नैया
News India Live, Digital Desk : पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस के भीतर चल रहा अंतर्विरोध एक बार फिर सतह पर आ गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और अक्सर अपने बयानों से चर्चा में रहने वाले मणिशंकर अय्यर ने पार्टी की आंतरिक स्थिति पर तीखी टिप्पणी की है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
केरल से असम तक 'असंतोष' की लहर?
मणिशंकर अय्यर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब केरल, असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। अय्यर ने संकेत दिया है कि पार्टी के भीतर सांगठनिक बदलावों की जरूरत है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से नेतृत्व की कार्यशैली और चुनाव प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केरल में जहां कांग्रेस अपनी वापसी की उम्मीद कर रही है, वहीं पार्टी के भीतर की गुटबाजी राहुल गांधी की मेहनत पर पानी फेर सकती है। असम में गठबंधन को लेकर जारी खींचतान और बंगाल में वामदलों के साथ तालमेल ने कार्यकर्ताओं के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
राहुल गांधी के सामने दोहरी चुनौती
एक तरफ राहुल गांधी दक्षिण भारत से लेकर पूर्वोत्तर तक धुआंधार रैलियां कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ 'G-23' (कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं का समूह) के सुर पार्टी की एकता को चुनौती दे रहे हैं। मणिशंकर अय्यर की हालिया टिप्पणियों को इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
अय्यर ने पार्टी की कार्यसमिति (CWC) और निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की वकालत की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो चुनावी राज्यों में पार्टी की स्थिति नाजुक हो सकती है।
भाजपा को मिला हमला करने का मौका
कांग्रेस की इस आंतरिक कलह पर भाजपा ने चुटकी लेते हुए कहा है कि जिस पार्टी के नेता ही अपनी लीडरशिप पर भरोसा नहीं कर पा रहे, वह जनता का विश्वास कैसे जीतेगी।
क्या होगा आगामी चुनावों पर असर?
केरल: यूडीएफ (UDF) के भीतर मुख्यमंत्री पद के चेहरों को लेकर खींचतान।
तमिलनाडु: द्रमुक (DMK) के साथ सीटों के बंटवारे पर असंतोष।
पश्चिम बंगाल: टीएमसी और भाजपा की सीधी जंग में कांग्रेस का अस्तित्व बचाना मुश्किल।
असम: सीएए (CAA) के मुद्दे पर वोटों का ध्रुवीकरण।
कांग्रेस आलाकमान के लिए अब यह चुनौती है कि वह चुनाव प्रचार पर ध्यान केंद्रित करे या घर के भीतर लगी इस 'सियासी आग' को बुझाए। मणिशंकर अय्यर के इस नए रुख ने राहुल गांधी के रणनीतिकारों की चिंता निश्चित रूप से बढ़ा दी है।