हिमाचल विधानसभा में हाई वोल्टेज ड्रामा सिर्फ 2 मिनट में राज्यपाल ने खत्म किया भाषण, आखिर क्यों बिगड़ी बात
News India Live, Digital Desk: हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र आज हंगामे की भेंट चढ़ गया। सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होनी थी, लेकिन जो हुआ उसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने सदन में खड़े होकर केवल अभिभाषण के पहले और आखिरी पन्ने को पढ़ा और महज 120 सेकंड के भीतर अपना संबोधन समाप्त घोषित कर दिया।
विपक्ष का वॉकआउट और नारेबाजी
जैसे ही राज्यपाल ने अपना संक्षिप्त संबोधन खत्म किया, मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने इसे 'लोकतंत्र की हत्या' और 'संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन' बताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने राज्यपाल के अभिभाषण में झूठ का पुलिंदा तैयार किया था, जिसे पढ़ने से राज्यपाल ने परहेज किया।
क्या था विवाद का मुख्य केंद्र?
सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल के अभिभाषण में राज्य की वित्तीय स्थिति और पिछली सरकार की नीतियों पर कुछ तीखी टिप्पणियां थीं। विपक्षी दल का दावा है कि राज्यपाल ने जानबूझकर इस विवाद से बचने के लिए संक्षिप्त रास्ता चुना। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष (कांग्रेस) का कहना है कि यह राज्यपाल का विशेषाधिकार है कि वे पूरा भाषण पढ़ें या केवल उसके मुख्य अंश।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस घटनाक्रम पर हैरानी जताते हुए कहा कि सरकार ने नियमानुसार राज्यपाल को अभिभाषण सौंपा था। उन्होंने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा, "विपक्ष केवल सुर्खियां बटोरने के लिए हंगामा कर रहा है, जबकि हमें जनता के मुद्दों पर बजट पर चर्चा करनी चाहिए।"
सत्र के आगामी दिनों में टकराव के आसार
इस घटना ने साफ कर दिया है कि हिमाचल का यह बजट सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है। राज्यपाल के इस कदम ने न केवल सदन के भीतर बल्कि कानूनी विशेषज्ञों के बीच भी चर्चा छेड़ दी है कि क्या राज्यपाल द्वारा पूरा भाषण न पढ़ना संवैधानिक रूप से सही है।
मुख्य हाइलाइट्स:
रिकॉर्ड तोड़ संक्षिप्त भाषण: हिमाचल के संसदीय इतिहास के सबसे छोटे अभिभाषणों में से एक।
विपक्ष का कड़ा रुख: भाजपा ने राज्यपाल की गरिमा और सरकार की मंशा पर उठाए सवाल।
बजट पर संकट: हंगामे के चलते सदन की अन्य कार्यवाही भी प्रभावित होने की आशंका।