पाकिस्तान की प्यास और भारत की प्रगति रावी नदी का पानी रोका गया, शाहपुर कंडी डैम से बदलेगी जम्मू-कश्मीर और पंजाब की किस्मत

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News India Live, Digital Desk :  सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर स्थित 'शाहपुर कंडी' (Shahpur Kandi) बांध परियोजना का निर्माण कार्य पूरा होने के साथ ही रावी नदी का वह पानी, जो अब तक बहकर पाकिस्तान जा रहा था, उसे पूरी तरह से रोक दिया गया है।

45 साल का लंबा इंतजार हुआ खत्म

इस परियोजना की नींव 1979 में रखी गई थी, लेकिन आपसी विवादों और तकनीकी कारणों से यह दशकों तक अटकी रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस प्रोजेक्ट को 'राष्ट्रीय परियोजना' का दर्जा देकर तेजी से पूरा किया गया। अब रावी नदी के पानी को स्टोर करके इसका इस्तेमाल बिजली बनाने और सिंचाई के लिए किया जाएगा।

इन क्षेत्रों को होगा सीधा फायदा

शाहपुर कंडी बांध से निकलने वाला पानी विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों के लिए वरदान साबित होगा।

सिंचाई: जम्मू-कश्मीर की लगभग 32,000 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।

बिजली: इस प्रोजेक्ट से 206 मेगावाट बिजली पैदा होगी, जिससे पंजाब और आसपास के राज्यों को लाभ होगा।

कृषि क्रांति: जो इलाका अब तक सूखे की मार झेल रहा था, वहां अब साल भर फसलों की सिंचाई हो सकेगी।

सिंधु जल संधि और भारत का अधिकार

1960 की सिंधु जल संधि के अनुसार, तीन पूर्वी नदियों— रावी, ब्यास और सतलज —के पानी पर भारत का पूर्ण अधिकार है। वहीं पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चेनाब) का पानी पाकिस्तान को जाता है। अब तक शाहपुर कंडी बांध न होने के कारण रावी का काफी पानी पाकिस्तान चला जाता था, लेकिन अब भारत ने अपने हक का पानी सुरक्षित कर लिया है।

पाकिस्तान पर इसका असर

रावी का पानी रुकने से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कुछ इलाकों में पानी की किल्लत बढ़ सकती है। भारत का यह कदम सामरिक और रणनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह 'पानी' पर भारत के संप्रभु अधिकारों को मजबूत करता है।

मुख्य आंकड़े:

बांध की ऊंचाई: 55.5 मीटर।

सिंचाई क्षमता: 1,150 क्यूसेक पानी अब जेएंडके (J&K) की ओर मुड़ेगा।

लागत: करोड़ों की लागत वाली यह परियोजना भारत की जल सुरक्षा के लिए मील का पत्थर है।