'पहले गिफ्ट दो, फिर मिलेगा खाना': साउथ कोरिया में शादी अटेंड करने पहुंची भारतीय महिला, लिफाफे के बदले मिला मील कूपन तो उड़े होश; सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

'पहले गिफ्ट दो, फिर मिलेगा खाना': साउथ कोरिया में शादी अटेंड करने पहुंची भारतीय महिला, लिफाफे के बदले मिला मील कूपन तो उड़े होश; सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

भारतीय शादियों में मेहमानों का स्वागत हाथ जोड़कर, गर्मजोशी और बिना किसी शर्त के शाही दावतों के साथ किया जाता है। हमारे यहां लिफाफा देना या न देना मेहमान की अपनी मर्जी पर निर्भर करता है और खाने की मेज सभी के लिए हमेशा खुली रहती है। लेकिन जब एक भारतीय महिला दक्षिण कोरिया (South Korea) में अपने सहकर्मी की शादी में शामिल होने पहुंची, तो वहां के रीति-रिवाजों ने उसके होश उड़ा दिए। सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए इस महिला ने कोरियाई वेडिंग हॉल का अपना अनुभव बताया, जिसे देखकर इंटरनेट यूजर्स दंग रह गए हैं। महिला के मुताबिक, वेडिंग वेन्यू पर कदम रखते ही सबसे पहले एक रिसेप्शन डेस्क दिखाई दी, जहां मेहमानों को सीधे बैंक्वेट हॉल जाने की इजाजत नहीं थी, बल्कि अंदर जाने और भोजन करने के लिए पहले एक निर्धारित औपचारिकता पूरी करनी थी।

लिफाफा काउंटर पर जमा, बदले में मिला 'मील कूपन'

महिला ने अपने वीडियो में विस्तार से दिखाया कि जैसे ही कोई मेहमान वेडिंग हॉल के मुख्य द्वार पर पहुंचता है, वहां दूल्हा और दुल्हन दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग रिसेप्शन काउंटर बने होते हैं। यहां मेहमानों को एक लिफाफे में नकद रकम (Congratulatory Money) डालकर देनी होती है और उस लिफाफे पर अपना नाम और रिश्ता साफ-साफ लिखना होता है। जैसे ही काउंटर पर बैठे परिजन उस लिफाफे को स्वीकार कर रजिस्टर में नाम दर्ज करते हैं, वे बदले में मेहमान को एक छोटा सा प्लास्टिक या पेपर का टोकन थमा देते हैं, जिसे वहां 'मील कूपन' (Meal Coupon) कहा जाता है। बिना इस टोकन के वेडिंग हॉल के डाइनिंग एरिया में प्रवेश पूरी तरह वर्जित होता है। महिला ने बताया कि भारत की 'अतिथि देवो भव:' की परंपरा में पली-बढ़ी होने के कारण उसके लिए यह दृश्य बिल्कुल किसी रेस्टोरेंट में एडवांस बिल चुकाकर टोकन लेने जैसा लगा, जिससे वह कुछ पलों के लिए हैरान रह गई।

दक्षिण कोरिया की 'चुक-उई-गम' परंपरा: आखिर क्यों दिया जाता है मील टोकन?

इस वीडियो के वायरल होने के बाद कई लोगों ने इसे रूखा और औपचारिकता भरा व्यवहार माना, लेकिन कोरियाई संस्कृति और परंपराओं को जानने वाले विशेषज्ञों ने इसके पीछे का सामाजिक और आर्थिक तर्क समझाया है। दक्षिण कोरिया में शादी में नकद उपहार देने की इस सदियों पुरानी परंपरा को 'चुक-उई-गम' (Chuk-ui-geum) कहा जाता है। कोरियाई समाज में शादी को एक सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाता है। वहां वेडिंग हॉल, लाइव म्यूजिक और बुफे का खर्च बहुत अधिक होता है।

यह टोकन सिस्टम मुख्य रूप से तीन कारणों से लागू किया जाता है:

  • सटीक कैटरिंग प्रबंधन: कोरिया में वेडिंग हॉल्स में शादियां तय स्लॉट (आमतौर पर 1 से 2 घंटे) में होती हैं। मील कूपन व्यवस्था से कैटरिंग टीम को सटीक पता चलता है कि कितने लोगों ने खाना खाया, जिससे भोजन की बर्बादी पूरी तरह रुक जाती है।

  • शादी के भारी खर्च में साझेदारी: नकद शगुन नवविवाहित जोड़े को नए जीवन की शुरुआत करने और शादी के महंगे वेन्यू का किराया चुकाने में सीधे तौर पर आर्थिक मदद पहुंचाता है।

  • पारदर्शिता और रिकॉर्ड: कौन सा रिश्तेदार या दोस्त कितनी राशि भेंट कर रहा है, इसका लिखित हिसाब रखा जाता है ताकि जब उस मेहमान के परिवार में कोई शादी हो, तो मेजबान भी उतनी ही राशि लौटाकर सामाजिक संतुलन बनाए रखे।

सोशल मीडिया पर आमने-सामने भारतीय और कोरियाई शादी के तौर-तरीके

इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दिलचस्प बहस छिड़ गई है। जहां कई भारतीय यूजर्स ने चुटकी लेते हुए कहा कि "अगर हमारे यहां ऐसा सिस्टम लागू कर दिया जाए, तो आधे रिश्तेदार बिना खाए ही नाराज होकर लौट जाएंगे और शादी में क्लेश हो जाएगा", वहीं कई अन्य लोगों ने इसे बेहद व्यावहारिक और आधुनिक सोच करार दिया। कुछ यूजर्स का कहना था कि भारत में शादियों के दौरान कैटरिंग में होने वाली भारी बर्बादी और गैर-जरूरी भीड़ को देखते हुए यह कूपन सिस्टम वित्तीय रूप से काफी समझदारी भरा है। हालांकि, अधिकांश लोगों का मानना है कि कोरियाई शादियों में व्यावहारिकता और औपचारिकता तो बहुत सटीक है, लेकिन भारतीय शादियों में जो आत्मीयता, शोर-शराबा और खुले दिल से मेहमाननवाजी देखने को मिलती है, उसकी तुलना दुनिया के किसी भी कोने से नहीं की जा सकती।