देशभर के हाइवे से जल्द खत्म होंगे टोल प्लाजा: नितिन गडकरी ने किया ऐलान, फरवरी-मार्च 2027 तक लागू होगा एडवांस MLFF मॉडल

देशभर के हाइवे से जल्द खत्म होंगे टोल प्लाजा: नितिन गडकरी ने किया ऐलान, फरवरी-मार्च 2027 तक लागू होगा एडवांस MLFF मॉडल

भारतीय सड़क परिवहन और राजमार्ग ढांचे में एक बहुत ही क्रांतिकारी और ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत होने जा रही है, जो आने वाले समय में देश के करोड़ों वाहन चालकों के सफर को पूरी तरह से बदल कर रख देगी। मुंबई में आयोजित प्रतिष्ठित 'ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026' के दौरान देश के केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बेहद बड़ा और बहुप्रतीक्षित ऐलान किया है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर यह घोषणा की है कि आने वाले कुछ महीनों में देश के तमाम राष्ट्रीय राजमार्गों यानी नेशनल हाइवे से पारंपरिक टोल प्लाजा का अस्तित्व हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। भारत अब पूरी तरह से डिजिटल, आधुनिक और बैरियर-फ्री टोल कलेक्शन सिस्टम की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय मंत्री ने यह स्पष्ट किया है कि यह अत्याधुनिक व्यवस्था अगले साल यानी फरवरी-मार्च 2027 तक पूरे देश में पूरी तरह से लागू हो जाएगी, जिसके बाद सफर के दौरान टोल पर रुकने या कतारों में खड़े होने की पुरानी व्यवस्था का अंत हो जाएगा। सरकार का यह कदम देश के लॉजिस्टिक्स सेक्टर, आम नागरिकों के समय और ईंधन की बचत के लिहाज से एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है, जिससे भारतीय परिवहन प्रणाली वैश्विक स्तर की आधुनिक व्यवस्था के समकक्ष खड़ी हो जाएगी।

क्या है मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) मॉडल और कैसे करेगा यह काम

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा घोषित किए गए इस नए और अत्याधुनिक सिस्टम का नाम मल्टी-लेन फ्री फ्लो यानी MLFF मॉडल है। यह एक पूरी तरह से बैरियर-फ्री इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है, जो सड़क के ऊपर बनाई जाने वाली ओवरहेड गैंट्री का इस्तेमाल करके वाहनों की पहचान करता है और उनके खातों से आटोमैटिक टोल टैक्स वसूल लेता है। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी खूबी यह है कि गाड़ियों को अपनी सामान्य गति से आगे बढ़ते समय टोल बूथ पर न तो रुकने की जरूरत पड़ेगी और न ही अपनी स्पीड को धीमा करने की आवश्यकता होगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस नई व्यवस्था को लाने का मुख्य उद्देश्य टोल कलेक्शन के नाम पर गाड़ियों को रोकने या उनकी गति को बाधित करने की प्रक्रिया को पूरी तरह से खत्म करना है। वर्तमान समय में टोल प्लाजा पर वाहनों के रुकने और दोबारा रफ्तार पकड़ने की वजह से भारी मात्रा में ईंधन की बर्बादी होती है, साथ ही वाहनों के इंजनों से निकलने वाला प्रदूषण भी बढ़ता है। MLFF मॉडल के आ जाने से गाड़ियों के आवागमन में कोई बाधा नहीं आएगी, जिससे ईंधन की खपत में भारी कमी आएगी और टोल प्लाजा के संचालन तथा रख-रखाव पर होने वाले भारी-भरकम ऑपरेशनल खर्च से भी बड़ी राहत मिलेगी।

दिल्ली में सफल प्रयोग के बाद अब देश भर में लागू होगी यह तकनीक

इस महत्वाकांक्षी योजना की रूपरेखा और समयसीमा के बारे में विस्तार से बताते हुए नितिन गडकरी ने फिनटेक फेस्ट के दौरान कहा कि सरकार की यह स्पष्ट योजना है कि अगले एक साल के भीतर देश के सभी टोल नेटवर्क को इस आधुनिक MLFF मॉडल पर ट्रांसफर कर दिया जाए। उन्होंने बताया कि उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को यह कड़े निर्देश दिए हैं कि दिसंबर 2026 तक इस दिशा में तेज गति से कार्य पूरा किया जाए। उन्हें पूरा विश्वास है कि साल के अंत तक देश का 60% से 70% काम पूरी तरह से पूरा हो चुका होगा और निर्धारित समयावधि यानी फरवरी-मार्च 2027 तक पूरे देश में यह बैरियर-फ्री टोल प्लाजा सिस्टम जमीनी स्तर पर प्रभावी हो जाएगा। गौरतलब है कि इस तकनीक का सफल परीक्षण पहले ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में किया जा चुका है। इससे पहले मई महीने में नितिन गडकरी ने नई दिल्ली की अर्बन एक्सटेंशन रोड-II पर मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा पर देश के पहले बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम का औपचारिक उद्घाटन किया था। उस परियोजना की सफलता से मिले उत्साह और अनुभवों के आधार पर ही अब इस मॉडल को देश के सभी प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर चरणबद्ध तरीके से लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है।

सालाना 6,000 से 7,000 करोड़ रुपये की भारी बचत और ऑपरेशनल खर्च में गिरावट

निसंदेह इस नई तकनीक से केवल यात्रियों का समय ही नहीं बचेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी इसका बहुत बड़ा प्रत्यक्ष लाभ मिलने जा रहा है। MLFF मॉडल के वित्तीय पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पारंपरिक टोल प्लाजा के संचालन का वर्तमान खर्च लगभग 12% से 15% के बीच आता है, जो इस बैरियर-फ्री टोलिंग मॉडल के पूरे देश में लागू होने के बाद घटकर मात्र 2% से 4% के आसपास रह जाने की उम्मीद है। इस अभूतपूर्व कमी के कारण देश को सालाना लगभग 6,000 करोड़ से 7,000 करोड़ रुपये की सीधी बचत करने में मदद मिलेगी। मंत्री ने याद दिलाया कि इससे पहले फास्टैग (FASTag) प्रणाली के आने से टोल प्लाजा पर इंतजार के समय में भारी कमी आई थी और कैश पेमेंट तथा छुट्टे पैसों के लेन-देन की झंझट पूरी तरह समाप्त हो गई थी, जिससे सिस्टम में अभूतपूर्व पारदर्शिता आई थी। फास्टैग के व्यापक उपयोग और डिजिटल टोलिंग की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने से सरकार को पहले ही सालाना लगभग 20,000 करोड़ से 25,000 करोड़ रुपये का सीधा फायदा हो रहा है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि डिजिटल व्यवस्था अपनाने से सरकारी राजस्व में जो बढ़ोतरी हुई है, वह देश के बुनियादी ढांचे के विकास में एक मजबूत आर्थिक संबल प्रदान कर रही है।

समय और ईंधन की बचत से देश को मिलेंगे बड़े आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ

टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों के इतिहास बनने से देश के नागरिकों के कीमती समय और प्राकृतिक संसाधनों की किस स्तर पर बचत होगी, इसके आंकड़े भी बेहद चौंकाने वाले हैं। गडकरी ने जानकारी दी कि फास्टैग और अन्य डिजिटल सुधारों के कारण टोल प्लाजा पर वाहनों के इंतजार का समय पहले की तुलना में नगण्य हुआ है। एक समय था जब टोल पर औसतन 12 मिनट का इंतजार करना पड़ता था और छुट्टियों या पीक आवर्स में यह समय बढ़कर 30 मिनट तक पहुंच जाता था। सरकार ने हर टोल प्लाजा पर वेटिंग टाइम का आकलन करने के लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर विकसित किया है, जिसके माध्यम से मॉनिटरिंग की जा रही है। इन तमाम तकनीकी सुधारों के परिणामस्वरूप आज देश में हर साल लगभग 71 करोड़ घंटे के कीमती समय और करीब 56 करोड़ लीटर ईंधन की बचत हो रही है। केवल ईंधन की कीमत के रूप में ही देशवासियों के लगभग 5,250 करोड़ रुपये बच रहे हैं, जबकि यात्रियों के इस बचाए गए समय की आर्थिक कीमत का आकलन सालाना लगभग 68,500 करोड़ रुपये लगाया गया है। इस प्रकार, आगामी वर्ष 2027 में जब देश पूरी तरह से MLFF मॉडल को अपना लेगा, तो भारतीय सड़कों पर सफर करना न केवल पूरी तरह से सुगम, तेज और तनावमुक्त हो जाएगा, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि में भी एक नया और स्वर्णिम अध्याय लिख देगा।