विक्रम दोरईस्वामी होंगे चीन में भारत के नए राजदूत ,विवादों के बीच बीजिंग की कमान संभालेंगे ये धाकड़ राजनयिक
News India Live, Digital Desk : भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पिछले कई वर्षों से चल रहे गतिरोध के बीच, केंद्र सरकार ने बीजिंग में अपनी सबसे अनुभवी 'फॉरवर्ड टीम' को तैनात करने का फैसला किया है। विक्रम दोरईस्वामी, जो वर्तमान में ब्रिटेन (UK) में भारत के उच्चायुक्त हैं, अब बीजिंग में भारतीय दूतावास की कमान संभालेंगे।
1. कौन हैं विक्रम के. दोरईस्वामी? (Who is Vikram Doraiswami?)
1992 बैच के IFS अधिकारी: विक्रम दोरईस्वामी भारतीय विदेश सेवा (IFS) के 1992 बैच के वरिष्ठ अधिकारी हैं।
अनुभव का खजाना: उन्होंने उज्बेकिस्तान, दक्षिण कोरिया और बांग्लादेश में भारत के राजदूत/उच्चायुक्त के रूप में सफलतापूर्वक अपनी सेवाएं दी हैं।
चीन मामलों के विशेषज्ञ: वे मंदारिन (चीनी भाषा) जानते हैं और इससे पहले भी बीजिंग में भारतीय मिशन में काम कर चुके हैं। उन्हें चीन की विदेश नीति और रणनीतिक सोच की गहरी समझ मानी जाती है।
2. बीजिंग में उनकी नियुक्ति के मायने (Significance)
चीन में भारतीय राजदूत की भूमिका इस समय दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण राजनयिक भूमिकाओं में से एक है:
LAC विवाद: पूर्वी लद्दाख में सैन्य वापसी की प्रक्रिया और देपसांग-डेमचोक जैसे विवादित बिंदुओं पर बातचीत को आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकता होगी।
आर्थिक संबंध: भारत के बढ़ते व्यापार घाटे और चीनी निवेश पर लगी पाबंदियों के बीच आर्थिक संवाद को संतुलित करना।
ब्रिक्स और एससीओ: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन के साथ भारत के हितों की रक्षा करना।
3. अब तक का करियर और उपलब्धियां
बांग्लादेश में कार्यकाल: ढाका में उच्चायुक्त रहते हुए उन्होंने भारत और बांग्लादेश के बीच कनेक्टिविटी और रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया था।
ब्रिटेन में भूमिका: लंदन में रहते हुए उन्होंने 'भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते' (FTA) की वार्ताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और खालिस्तानी गतिविधियों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा।
पत्रकारिता से कूटनीति तक: आईएफएस अधिकारी बनने से पहले उन्होंने एक साल तक पत्रकार के रूप में भी काम किया था।