इंदिरा गांधी और शेख मुजीबुर रहमान के बीच था गुप्त समझौता? भाजपा सांसद का आरोप- कांग्रेस ने बांग्लादेशियों को दी थी फ्री हैंड
News India Live, Digital Desk: लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि 1971 के युद्ध के बाद इंदिरा गांधी और शेख मुजीबुर रहमान के बीच एक ऐसा समझौता हुआ था जिसे कभी सार्वजनिक नहीं किया गया। इस समझौते के तहत कथित तौर पर वोट बैंक की राजनीति के लिए घुसपैठ को नजरअंदाज करने की बात कही गई थी।
1. भाजपा सांसद के आरोपों की 3 मुख्य बातें
अवैध घुसपैठ पर मौन: सांसद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने दशकों तक पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिम बंगाल में होने वाली अवैध घुसपैठ को जानबूझकर बढ़ावा दिया ताकि एक सुरक्षित 'वोट बैंक' तैयार किया जा सके।
दस्तावेजों का हवाला: उन्होंने दावा किया कि खुफिया फाइलों में ऐसे संकेत मिलते हैं कि तत्कालीन सरकार ने सीमा सुरक्षा की कीमत पर राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी थी।
डेमोग्राफिक बदलाव: भाजपा नेता ने तर्क दिया कि इसी 'गुप्त समझौते' का नतीजा है कि आज सीमावर्ती जिलों की जनसांख्यिकी (Demography) पूरी तरह बदल चुकी है।
2. ऐतिहासिक संदर्भ: 1972 का भारत-बांग्लादेश मैत्री संधि
आधिकारिक तौर पर, 19 मार्च 1972 को ढाका में इंदिरा गांधी और शेख मुजीबुर रहमान के बीच 'भारत-बांग्लादेश मैत्री, सहयोग और शांति संधि' पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके मुख्य बिंदु थे:
संप्रभुता का सम्मान: दोनों देशों ने एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने का वादा किया था।
सैन्य सहायता: किसी भी तीसरे पक्ष के हमले की स्थिति में एक-दूसरे की मदद करना।
सांस्कृतिक और आर्थिक विनिमय: व्यापार और विकास में सहयोग।
शरणार्थियों की वापसी: युद्ध के दौरान आए लाखों शरणार्थियों को वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू करना।
3. कांग्रेस की प्रतिक्रिया (Opposition's Stand)
कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को "पूरी तरह निराधार और इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने वाला" करार दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है:
मुक्ति वाहिनी और गर्व का क्षण: 1971 की जीत और बांग्लादेश का निर्माण भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक और सैन्य जीत थी, जिस पर उंगली उठाना सेना का अपमान है।
चुनावी स्टंट: विपक्ष का आरोप है कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों (पश्चिम बंगाल और असम) को देखते हुए ध्रुवीकरण करने के लिए पुराने इतिहास को खोद रही है।
4. विशेषज्ञों की राय
इतिहासकारों का मानना है कि 1972 की संधि पारदर्शी थी, लेकिन सीमा प्रबंधन (Border Management) और नागरिकता के मुद्दे (जैसे मुजीब-इंदिरा पैक्ट के तहत कट-ऑफ डेट) हमेशा से विवाद का विषय रहे हैं। भाजपा का यह नया दावा 'गुप्त समझौते' की बात कहकर इस विवाद को एक नया राजनीतिक आयाम दे रहा है।