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April 09 2026 11:11 pm

FD के ब्याज पर कट जाएगा मोटा TDS! टैक्स बचाने के लिए अप्रैल में सबसे पहले निपटा लें यह जरूरी काम

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नया वित्तीय वर्ष 2026-27 शुरू हो चुका है और इसी के साथ आपकी कमाई और निवेश को लेकर नई प्लानिंग का समय भी आ गया है। भारतीय परिवारों में निवेश के लिए आज भी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) सबसे पसंदीदा और सुरक्षित विकल्प माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी एफडी से होने वाली शानदार कमाई पर बैंक टीडीएस (TDS) के रूप में कैंची चला सकता है? अगर आप चाहते हैं कि आपके मुनाफे का एक भी रुपया टैक्स में न कटे, तो आपको इस अप्रैल महीने की शुरुआत में ही एक बेहद जरूरी काम निपटा लेना चाहिए। आइए जानते हैं कि टीडीएस से बचने का यह अचूक तरीका क्या है।

क्या है एफडी पर टीडीएस कटने का नियम?

आयकर नियमों के अनुसार अगर किसी बैंक, पोस्ट ऑफिस या को-ऑपरेटिव बैंक में जमा आपकी एफडी से मिलने वाला ब्याज एक वित्तीय वर्ष में 40,000 रुपये से अधिक हो जाता है, तो बैंक उस पर 10% टीडीएस काट लेता है। वहीं वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) के मामले में यह छूट सीमा 50,000 रुपये तक है। अगर आपने अपना पैन कार्ड (PAN Card) बैंक खाते से लिंक नहीं किया है, तो यह टीडीएस कटकर सीधा 20% हो जाता है। इसलिए मुनाफे को सुरक्षित रखने के लिए समय रहते इस कटौती को रोकना बहुत जरूरी है।

फॉर्म 15G और 15H हैं टैक्स बचाने का असली हथियार

अगर आपकी कुल सालाना आय इनकम टैक्स की बेसिक छूट सीमा (Basic Exemption Limit) के अंदर आती है और आपको लगता है कि आपकी एफडी से होने वाली कमाई पर बेवजह टीडीएस कट सकता है, तो आपको तुरंत अपने बैंक में 'फॉर्म 15G' या 'फॉर्म 15H' जमा कर देना चाहिए। यह फॉर्म बैंक को एक सेल्फ-डिक्लेरेशन (घोषणा पत्र) देता है कि आपकी कुल आय टैक्स योग्य नहीं है, इसलिए आपके ब्याज से कोई टीडीएस न काटा जाए।

जानिए किसे भरना चाहिए कौन सा फॉर्म?

इन दोनों फॉर्म का मूल काम एक ही है, लेकिन आयकर विभाग ने इन्हें उम्र के आधार पर बांटा है। अगर आपकी उम्र 60 साल से कम है (यानी आप सीनियर सिटीजन नहीं हैं) और आपकी कुल आय टैक्स के दायरे में नहीं आती है, तो आपको टीडीएस बचाने के लिए बैंक में 'फॉर्म 15G' जमा करना होगा। वहीं दूसरी तरफ, 60 साल या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को टीडीएस कटौती से बचने के लिए बैंक में 'फॉर्म 15H' भरकर देना होता है।

अप्रैल महीने में ही क्यों है यह काम सबसे जरूरी?

वित्तीय विशेषज्ञों की सलाह है कि यह डिक्लेरेशन फॉर्म हमेशा वित्तीय वर्ष की शुरुआत यानी अप्रैल महीने के पहले हफ्ते में ही जमा कर देना चाहिए। दरअसल, बैंक आमतौर पर हर तिमाही में ब्याज आपके खाते में क्रेडिट करते हैं और उसी समय टीडीएस भी काट लिया जाता है। अगर आप साल के अंत में यह फॉर्म जमा करेंगे, तो हो सकता है बैंक शुरुआती तिमाहियों का टीडीएस पहले ही काट चुका हो। हालांकि कटे हुए टीडीएस को आप बाद में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करके वापस (Refund) पा सकते हैं, लेकिन रिफंड की इस लंबी और झंझट भरी प्रक्रिया से बचने का सबसे स्मार्ट तरीका यही है कि अप्रैल में ही अपना काम पक्का कर लें। आजकल लगभग सभी बैंक नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे इन फॉर्म को ऑनलाइन सबमिट करने की सुविधा देते हैं।