अकाल तख्त पर नतमस्तक हुए यूनिवर्सिटी के कुलपति, लंगर हॉल में बर्तन धोकर शुरू किया प्रायश्चित

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News India Live, Digital Desk : सोमवार को अमृतसर के स्वर्ण मंदिर (Golden Temple) परिसर में एक ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जो समाज के हर वर्ग के लिए एक बड़ा संदेश है। गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (GNDU) के वाइस चांसलर, डॉ. करमजीत सिंह, आज एक आम श्रद्धालु की तरह लंगर घर में सेवा करते नज़र आए। अकाल तख्त साहिब के आदेश के बाद उन्होंने अपने पद का अहंकार छोड़कर "धार्मिक सजा" (तनख्वाह) को सिर माथे स्वीकार किया।

आखिर वीसी साहब को सेवा क्यों करनी पड़ी?

मामला सिखों के इतिहास और भावनाओं से जुड़ा है। दरअसल, GNDU के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जा रही कुछ इतिहास की किताबों में सिख गुरुओं और सिख इतिहास के बारे में गलत और आपत्तिजनक तथ्य छापे गए थे। इसको लेकर सिख समुदाय में काफी रोष था। इसी मामले में श्री अकाल तख्त साहिब ने कुलपति को तलब किया था।

मांगी माफी, मिली सजा

सोमवार को वीसी डॉ. करमजीत सिंह पंज सिंह साहिबान के सामने पेश हुए। उन्होंने माना कि सिलेबस निगरानी में कोताही हुई है और वे इसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं। उनकी दलीलों को सुनने के बाद जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने उन्हें 'धार्मिक तनख्वाह' सुनाई।

आदेश मिलते ही वाइस चांसलर सीधे सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के लंगर हॉल में पहुंचे। वहां उन्होंने संगत के जूठे बर्तन साफ़ करने की सेवा शुरू कर दी।

क्या-क्या करना होगा कुलपति को?

अकाल तख्त ने उन्हें सिर्फ़ माफ़ नहीं किया, बल्कि उन्हें अपनी जड़ों और रूहानियत से जुड़ने का मौका दिया है:

  1. कीर्तन श्रवण: आदेश के मुताबिक, उन्हें एक घंटे तक दरबार साहिब में बैठकर गुरबाणी का कीर्तन सुनना था, जिसे उन्होंने आज ही पूरा किया।
  2. लंगर सेवा: बर्तन साफ़ करने की सेवा भी सजा का अहम हिस्सा थी।
  3. किताबों पर बैन: सबसे बड़ी बात, उन विवादित किताबों पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है और उन्हें सिलेबस से हटाने का वादा लिया गया है।

यह एक नज़ीर है

वीसी करमजीत सिंह को बर्तन धोते देख वहां मौजूद संगत भी भावुक हो गई। यह घटना साबित करती है कि 'दरबार साहिब' में राजा हो या रंक, कुलपति हो या छात्र मर्यादा सबके लिए बराबर है। जब बात धर्म और इतिहास की अस्मिता की आती है, तो बड़े से बड़ा ओहदा भी गौण हो जाता है।

सिख संगत उम्मीद कर रही है कि अब यूनिवर्सिटी प्रशासन भविष्य में ऐसी गलतियाँ नहीं दोहराएगा और इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने वाली किताबों को हमेशा के लिए बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।