Vastu Tips : क्या एक ही घर में होने चाहिए दो मंदिर? अनजाने में की गई ये गलती छीन सकती है सुख-चैन
News India Live, Digital Desk: घर में सुख, शांति और समृद्धि के लिए मंदिर (पूजा घर) का सही स्थान और दिशा होना बेहद जरूरी है। अक्सर लोग अपनी सुविधा या घर के अलग-अलग फ्लोर के अनुसार एक से ज्यादा मंदिर बना लेते हैं। लेकिन ज़ी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, वास्तु शास्त्र में एक ही घर के भीतर दो मंदिर होने को लेकर कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। यदि आप इन नियमों की अनदेखी करते हैं, तो इसका सीधा असर आपकी आर्थिक स्थिति और मानसिक शांति पर पड़ सकता है।
1. एक घर में दो मंदिर: सही या गलत? (One House, Two Temples?)
वास्तु शास्त्र के अनुसार, एक ही घर में दो अलग-अलग पूजा स्थल (मंदिर) होना शुभ नहीं माना जाता है।
ऊर्जा का टकराव: माना जाता है कि दो अलग-अलग जगहों पर पूजा होने से घर की सकारात्मक ऊर्जा बंट जाती है, जिससे परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य की कमी हो सकती है।
मानसिक अशांति: घर में दो मंदिर होने से एकाग्रता भंग होती है और मन में दुविधा बनी रहती है। वास्तु के अनुसार, पूरे परिवार का एक ही मुख्य पूजा स्थल होना चाहिए जहाँ सब मिलकर आराधना कर सकें।
2. अगर मजबूरी में हों दो मंदिर, तो रखें ये ध्यान (Special Vastu Rules)
यदि आपका घर बहुत बड़ा है या कई मंजिलों (Floors) में बंटा है और आपको दो मंदिर रखने ही पड़ रहे हैं, तो इन बातों का पालन अवश्य करें:
आमने-सामने न हों: कभी भी दो मंदिर इस तरह न बनाएं कि वे एक-दूसरे के ठीक सामने हों। यह वास्तु दोष पैदा करता है।
दिशा का चुनाव: मुख्य मंदिर हमेशा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में ही होना चाहिए। यदि दूसरा मंदिर बनाना पड़े, तो उसे भी पूर्व दिशा की ओर रखने का प्रयास करें।
मूर्तियों का आकार: दूसरे मंदिर में बड़ी मूर्तियाँ रखने से बचें। वहां केवल चित्र या छोटी मूर्तियाँ ही रखें।
3. मंदिर की सही दिशा और स्थान (Right Direction for Mandir)
वास्तु के अनुसार मंदिर स्थापित करते समय इन 3 गलतियों से हमेशा बचें:
सीढ़ियों के नीचे: कभी भी सीढ़ियों के नीचे या स्टोर रूम में मंदिर न बनाएं। यह भारी वास्तु दोष माना जाता है।
टॉयलेट के पास: पूजा घर कभी भी शौचालय के बगल में या उसके ठीक ऊपर-नीचे नहीं होना चाहिए।
शयनकक्ष (Bedroom): बेडरूम में मंदिर होना गृहस्थ जीवन के लिए अच्छा नहीं माना जाता। यदि जगह की कमी है, तो रात के समय मंदिर पर पर्दा अवश्य डालें।
4. मूर्तियों के चयन में न करें ये गलती (Idol Placement Rules)
एक ही देव की दो मूर्तियाँ: वास्तु के अनुसार, एक ही मंदिर में एक ही देवता की दो या उससे अधिक मूर्तियाँ या चित्र नहीं होने चाहिए। इससे घर में तनाव बढ़ता है।
खंडित मूर्ति: अगर कोई मूर्ति टूट गई है या तस्वीर फट गई है, तो उसे तुरंत हटा दें। खंडित मूर्तियों की पूजा से नकारात्मकता आती है।
अंगूठे से बड़ी मूर्ति: घर के मंदिर में कभी भी शिवलिंग या किसी देवता की मूर्ति अंगूठे के आकार से बड़ी नहीं होनी चाहिए। बड़ी मूर्तियों के लिए प्राण-प्रतिष्ठा और विशेष नियमों की आवश्यकता होती है जो केवल मंदिरों में संभव है।
5. आज (3 मार्च 2026) चंद्र ग्रहण और मंदिर का नियम
चूंकि आज 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लग रहा है, इसलिए वास्तु और धर्म के नियमों के अनुसार सूतक काल के दौरान मंदिर के पट बंद रखें। ग्रहण खत्म होने के बाद मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराएं और शुद्धिकरण के बाद ही पूजा करें। दो मंदिर होने की स्थिति में दोनों ही स्थानों का शुद्धिकरण अनिवार्य है।