Lunar Eclipse 2026 : देश के सभी मंदिर बंद, फिर क्यों खुला है केरल का यह अनोखा कृष्ण मंदिर? ग्रहण में भी नहीं रुकता प्रसाद

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News India Live, Digital Desk: आज 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लग चुका है। हिंदू धर्म और ज्योतिष के अनुसार, ग्रहण और सूतक काल के दौरान देशभर के छोटे-बड़े सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और मूर्तियों को स्पर्श करना भी वर्जित होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा अनोखा मंदिर भी है, जहाँ ग्रहण का कोई नियम लागू नहीं होता? केरल का श्री कृष्ण मंदिर (Kottayam, Kerala) आज भी खुला है और वहां भगवान को भोग लगाया जा रहा है।

1. कोट्टायम का तिरुवरप्पु श्री कृष्ण मंदिर (Thiruvarppu Sri Krishna Temple)

केरल के कोट्टायम जिले में स्थित यह मंदिर अपनी बेहद अनोखी परंपराओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। जहाँ पूरी दुनिया में सूतक लगते ही मंदिरों में सन्नाटा पसर जाता है, वहीं इस मंदिर में उत्सव जैसा माहौल रहता है।

परंपरा का रहस्य: मान्यताओं के अनुसार, यहाँ भगवान श्री कृष्ण 'भूखे' स्वरूप में विराजमान हैं।

कंस वध का प्रसंग: कहा जाता है कि कंस का वध करने के बाद कृष्ण को बहुत तेज भूख लगी थी, इसलिए इस मंदिर में उन्हें दिन में 10 बार भोग लगाया जाता है।

2. ग्रहण में भी क्यों नहीं बंद होते कपाट? (Why Temple Remains Open)

ज़ी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मंदिर के द्वार ग्रहण के दौरान भी बंद नहीं किए जाते। इसके पीछे की वजह बड़ी दिलचस्प है:

भूख नहीं सह सकते भगवान: पौराणिक कथाओं के अनुसार, यदि इस मंदिर के कपाट थोड़ी देर के लिए भी बंद कर दिए जाएं, तो भगवान को भूख बर्दाश्त नहीं होती और उनका शरीर सूखने लगता है।

भोग की अनिवार्यता: ग्रहण के समय भी यहाँ भगवान को विशेष नैवेद्यम (प्रसाद) चढ़ाया जाता है। पुजारियों का मानना है कि भगवान की भूख मिटाना किसी भी ज्योतिषीय सूतक से ऊपर है।

3. मंदिर की चाबी के साथ रखी जाती है कुल्हाड़ी!

इस मंदिर की एक और हैरान करने वाली परंपरा है। यहाँ के पुजारी हमेशा अपने साथ एक कुल्हाड़ी (Axe) रखते हैं।

वजह: यदि कभी चाबी से मंदिर का ताला खोलने में देरी हो जाए, तो पुजारी को आदेश है कि वह कुल्हाड़ी से ताला तोड़कर भीतर जाए और भगवान को भोजन कराए।

भोजन का समय: यहाँ भगवान को सुबह 3 बजे से ही भोग लगाना शुरू कर दिया जाता है, ताकि उन्हें कभी खाली पेट न रहना पड़े।

4. आज 3 मार्च 2026: चंद्र ग्रहण का साया

आज के चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) के दौरान जहाँ अन्य मंदिरों में शुद्धिकरण और मंत्र जाप हो रहा है, वहीं तिरुवरप्पु मंदिर में श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं।

भक्तों की आस्था: दूर-दूर से लोग इस चमत्कार को देखने आते हैं कि कैसे एक मंदिर में 'भूखे कृष्ण' के लिए सदियों पुरानी परंपरा आज भी निभाई जा रही है।

प्रसाद का वितरण: ग्रहण काल में भी यहाँ भक्तों को प्रसाद बांटा जा रहा है, जो सामान्यतः अन्य स्थानों पर वर्जित होता है।

5. विज्ञान और धर्म का संगम

विशेषज्ञ इस मंदिर को आस्था का अटूट केंद्र मानते हैं। जहाँ एक तरफ विज्ञान ग्रहण के खगोलीय प्रभाव बताता है, वहीं यह मंदिर सिखाता है कि भक्ति और 'वात्सल्य भाव' (ममता) के सामने नियम भी शिथिल हो जाते हैं।