Papmochani Ekadashi 2026 : अनजाने में हुए पापों से मिलेगी मुक्ति जानें कब है पापमोचनी एकादशी? शुभ मुहूर्त, पारण समय और 3 अचूक उपाय

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News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'पापमोचनी एकादशी' के नाम से जाना जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी सभी प्रकार के पापों का नाश करने वाली मानी गई है। ज़ी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 में पापमोचनी एकादशी पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जिससे इस दिन की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाएगा।

1. पापमोचनी एकादशी 2026: सही तारीख और तिथि (Date & Tithi)

हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र कृष्ण एकादशी तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय इस प्रकार है:

एकादशी तिथि प्रारंभ: 13 मार्च 2026, शुक्रवार को दोपहर 12:44 बजे से।

एकादशी तिथि समाप्त: 14 मार्च 2026, शनिवार को सुबह 10:18 बजे तक।

व्रत की तारीख: उदया तिथि के अनुसार, पापमोचनी एकादशी का व्रत 14 मार्च 2026 (शनिवार) को रखा जाएगा।

2. शुभ मुहूर्त और पारण का समय (Shubh Muhurat & Parana Time)

एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब उसका पारण (व्रत खोलना) शुभ समय पर किया जाए:

पारण का समय: 15 मार्च 2026, रविवार को सुबह 06:31 बजे से 08:52 बजे के बीच।

द्वादशी तिथि: पारण के दिन द्वादशी तिथि समाप्त होने का समय सुबह 07:55 बजे है।

3. क्यों खास है पापमोचनी एकादशी? (Significance)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को ब्रह्महत्या, स्वर्ण चोरी या अनजाने में किए गए जघन्य पापों से मुक्ति मिलती है।

कथा का प्रसंग: पौराणिक कथाओं में ऋषि च्यवन के पुत्र मेधावी और अप्सरा मंजुघोषा के प्रसंग के माध्यम से इस व्रत की महिमा बताई गई है।

शनिवार का संयोग: चूंकि इस बार एकादशी शनिवार को है, इसलिए भगवान विष्णु के साथ-साथ शनि देव की कृपा पाने का भी उत्तम अवसर है।

4. सुख-समृद्धि के लिए करें ये 3 अचूक उपाय (Upay for Prosperity)

अगर आप जीवन में बाधाओं का सामना कर रहे हैं, तो ज़ी न्यूज़ द्वारा बताए गए ये उपाय जरूर आजमाएं:

तुलसी पूजन: शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और 11 बार परिक्रमा करें। (ध्यान रहे एकादशी पर तुलसी दल न तोड़ें)।

पीला भोग: भगवान विष्णु को पीले फल, पीले फूल और केसरिया खीर का भोग लगाएं। इससे आर्थिक तंगी दूर होती है।

पीपल को जल: शनिवार का दिन होने के कारण पीपल के पेड़ में जल अर्पित करें और सात बार कच्चा सूत लपेटें। इससे पितृ दोष से भी शांति मिलती है।

5. व्रत के दौरान क्या न करें? (Don'ts on Ekadashi)

चावल का त्याग: एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है, माना जाता है कि इस दिन चावल खाना जीव हत्या के समान है।

क्रोध और निंदा: इस दिन किसी की बुराई न करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।

नमक और अन्न: निर्जला या फलाहारी व्रत रखने वालों को साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग करना चाहिए।