लखनऊ-कानपुर हाईवे पर ₹107 करोड़ से बनेंगे अंडरपास और फुटओवर ब्रिज! दीपावली से शुरू होगा काम, जाम और हादसों से मिलेगी मुक्ति
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और औद्योगिक नगरी कानपुर को जोड़ने वाले सबसे व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-27) पर रोजाना सफर करने वाले लाखों दैनिक यात्रियों, वाहन चालकों और स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने लखनऊ-कानपुर हाईवे पर आए दिन लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम, क्रॉसिंग पॉइंट्स पर होने वाले जानलेवा सड़क हादसों और पैदल यात्रियों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए ₹107 करोड़ की व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को अंतिम मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत हाईवे के सबसे संवेदनशील ब्लैक स्पॉट्स और घनी आबादी वाले चौराहों पर आधुनिक व्हीकुलर अंडरपास (VUP), पैदल पारपथ अंडरपास (PUP) और लिफ्ट युक्त फुटओवर ब्रिज (FOB) का निर्माण किया जाएगा। एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार, परियोजना की टेंडरिंग प्रक्रिया और ग्राउंड सॉइल टेस्टिंग का काम पूरा हो चुका है और दीपावली के पावन पर्व के तुरंत बाद भारी मशीनों के साथ निर्माण कार्य धरातल पर शुरू कर दिया जाएगा।
₹107 करोड़ की लागत से क्या-क्या बनेगा और किन-किन चौराहों पर होगा काम
लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेजी से बढ़ते शहरीकरण, आउटर रिंग रोड (किसान पथ) के जुड़ाव और औद्योगिक इकाइयों के विस्तार के चलते वाहनों का दबाव क्षमता से तीन गुना अधिक बढ़ चुका है। इस ₹107 करोड़ के बजट से हाईवे पर निम्नलिखित प्रमुख संरचनाएं तैयार की जाएंगी:
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व्हीकुलर अंडरपास (VUP): बंथरा, जुनाबगंज और सोहरामऊ जैसे अति-व्यस्त तिराहों पर चार लेन के व्हीकुलर अंडरपास बनाए जाएंगे। इससे हाईवे का सीधा थ्रू-ट्रैफिक बिना रुके 80 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से निकल सकेगा, जबकि स्थानीय कस्बों, बाजारों और लिंक रोड से आने वाले दोपहिया व चार पहिया वाहन बिना किसी जाम के अंडरपास के नीचे से सुरक्षित आर-पार जा सकेंगे।
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पैदल अंडरपास व फुटओवर ब्रिज (FOB): अमौसी एयरपोर्ट मोड़, स्कूटर इंडिया चौराहा और सरोजनी नगर बाजार के पास आधुनिक फुटओवर ब्रिज बनाए जाएंगे। इनमें बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों की सुविधा के लिए दोनों तरफ स्वचालित सीढ़ियां (एस्केलेटर) या लिफ्ट की सुविधा भी शामिल की जा रही है ताकि पैदल राहगीरों को जान जोखिम में डालकर हाईवे की तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच से न गुजरना पड़े।
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सर्विस लेन का चौड़ीकरण व ड्रेनेज नेटवर्क: अंडरपास के दोनों किनारों पर 7-7 मीटर चौड़ी पक्की सर्विस लेन बनाई जाएगी। इसके अलावा, मानसून के दौरान हाईवे पर होने वाले जलभराव से निपटने के लिए कंक्रीट के आरसीसी ड्रेन का निर्माण होगा।
ब्लैक स्पॉट्स पर हादसों पर लगेगा ब्रेक: खत्म होगा 25 मिनट का ट्रैफिक जाम
लखनऊ ट्रैफिक पुलिस और एनएचएआई के संयुक्त सर्वे के अनुसार, बंथरा और जुनाबगंज तिराहे को राज्य के सबसे संवेदनशील 'एक्सीडेंट प्रोन ब्लैक स्पॉट्स' (हादसा संभावित क्षेत्र) में गिना जाता है। यहां मोहनलालगंज, रायबरेली रोड और उन्नाव की ओर जाने वाले भारी ट्रक व डंपर हाईवे क्रॉस करते हैं, जिससे पीक ऑवर्स में हर रोज 20 से 30 मिनट तक का भीषण जाम लग जाता है और अक्सर तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से दुर्घटनाएं होती हैं। नए अंडरपास बन जाने से चौराहा-मुक्त (Intersection-free) कॉरिडोर तैयार हो जाएगा। लंबी दूरी की बसें, एम्बुलेंस और कारें बिना किसी सिग्नल या रुकावट के सीधे निकल सकेंगी, जिससे लखनऊ के शहीद पथ से कानपुर की ओर निकलने का यात्रा समय लगभग 25 मिनट घट जाएगा।
आगामी लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से कैसे होगा तालमेल
यह परियोजना निर्माणाधीन 63 किलोमीटर लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (NE-6) के साथ एक पूरक नेटवर्क के रूप में काम करेगी। जहां नया एक्सप्रेसवे मुख्य रूप से लंबी दूरी के इंटर-सिटी और कमर्शियल ट्रैफिक को मात्र 35 से 40 मिनट में दोनों शहरों के बीच जोड़ेगा, वहीं मौजूदा पुराना एनएच-27 हाईवे स्थानीय आबादी, सरोजनी नगर, बंथरा, नवाबगंज पक्षी विहार और आसपास के ग्रामीण कस्बों की जीवनरेखा बना रहेगा। ₹107 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से पुराने हाईवे का आधुनिकीकरण होने से स्थानीय बाजार भी सुरक्षित रहेंगे और एक्सप्रेसवे बनने के बाद भी पुराने रूट पर किसी प्रकार की अराजकता या जाम की स्थिति नहीं बनेगी।
कार्य प्रगति और समय-सीमा: 12 से 14 महीने में पूरा होगा लक्ष्य
एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार, दीपावली के बाद निर्माण कार्य की शुरुआत सर्विस लेन के चौड़ीकरण और रूट डायवर्जन से की जाएगी ताकि मुख्य कैरिजवे पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बाधित न हो। ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर एक सुगम डायवर्जन प्लान पहले ही तैयार किया जा रहा है। निर्माण एजेंसी को 12 से 14 महीने की समयसीमा दी गई है, यानी आगामी वर्ष 2027 के अंत तक सभी अंडरपास और फुटओवर ब्रिज पूरी तरह तैयार कर जनता के लिए खोल दिए जाएंगे। उत्तर प्रदेश सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) और जिला प्रशासन ने परियोजना स्थल से बिजली के खंभों और भूमिगत पाइपलाइनों की शिफ्टिंग की अनुमति जारी कर दी है। इस निर्माण से राजधानी लखनऊ के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर कनेक्टिविटी और सुरक्षा का एक नया अध्याय शुरू होगा।