हाथों में मेहंदी और छलनी, दुल्हन की तरह सज-धजकर अस्पताल में बैठीं नर्सें

हाथों में मेहंदी और छलनी, दुल्हन की तरह सज-धजकर अस्पताल में बैठीं नर्सें

देशभर में जहां एक ओर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए करवा चौथ का पवित्र निर्जला व्रत रख रही हैं और शाम को सज-धजकर चाँद के दीदार का इंतजार कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जिन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। अपनी लंबित मांगों, बकाया वेतन और प्रमोशन की सुस्त रफ्तार को लेकर स्वास्थ्य विभाग की महिला कर्मचारियों ने विरोध का एक ऐसा अनूठा और हैरान करने वाला तरीका अपनाया कि देखने वाले भी दंग रह गए। हाथों में मेहंदी रचाए, सुहागिनों की तरह सोलह शृंगार किए और हाथ में छलनी व पूजा की थाली थामे महिला नर्सों ने अस्पताल परिसर के बाहर ही धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। करवा चौथ के पावन पर्व पर पतियों के बजाय सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ अनोखा रोष प्रदर्शन करते हुए इन महिला कर्मियों का यह रूप अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है और हर तरफ इसी की चर्चा हो रही है।

करवा चौथ के दिन क्यों सड़कों पर उतरीं नर्से? जानिए क्या है उनकी मुख्य मांगें और नाराजगी की वजह

एक तरफ जहां परिवार के साथ खुशियां मनाने का दिन होता है, वहीं इन महिला स्वास्थ्य कर्मियों को अपनी हक की लड़ाई लड़ने के लिए सड़कों और अस्पतालों के बाहर बैठना पड़ा। प्रदर्शन कर रही महिला नर्सों का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से अपनी जायज मांगों को लेकर प्रशासन के चक्कर काट रही हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। उनकी प्रमुख मांगों में समय पर वेतन भुगतान, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना, जोखिम भत्ता (Risk Allowance) देना और नर्सिंग कैडर में लंबे समय से लंबित पड़े प्रमोशन शामिल हैं। नर्सों का कहना है कि सरकार और विभाग बार-बार आश्वासन देकर सिर्फ समय बर्बाद कर रहे हैं, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति और मानसिक चैन दोनों तबाह हो चुके हैं। मजबूरी में उन्हें अपने सबसे बड़े त्योहार के दिन भी धरने पर बैठकर विरोध जताना पड़ रहा है।

दुल्हन की तरह सजकर सांकेतिक विरोध: छलनी और मेहंदी के जरिए सरकार को दिया कड़ा संदेश

प्रदर्शन के दौरान का नजारा बेहद भावुक और आंखें खोल देने वाला था। हाथों में सुंदर मेहंदी के डिजाइन, लाल-गुलाबी साड़ियां और सुहाग के प्रतीक चिन्हों से सजी इन नर्सों ने हाथ में करवा चौथ की छलनी और पूजा की थाली पकड़ रखी थी। मीडिया से बात करते हुए महिला कर्मियों ने कहा कि वे भी अपने घर पर अपने पति के साथ इस पर्व को उल्लाس के साथ मनाना चाहती थीं, लेकिन उनकी बेकद्री और सरकारी तंत्र की उदासीनता ने उन्हें इस स्थिति में ला खड़ा किया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह वे छलनी से चांद का दीदार कर अपने सुहाग की लंबी उम्र मांगती हैं, उसी तरह वे इस प्रदर्शन के जरिए सोई हुई प्रशासनिक व्यवस्था को जगाना चाहती हैं ताकि उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा असर, मरीजों और तीमारदारों को उठानी पड़ी भारी परेशानी

नर्सों के इस अचानक और उग्र प्रदर्शन के कारण सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था पर भी गहरा असर देखने को मिला। ओपीडी (OPD) से लेकर वार्डों तक में नर्सों की अनुपस्थिति के चलते मरीजों को अपने इलाज और दवाइयों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने आपातकालीन सेवाओं (Emergency Services) को पूरी तरह बाधित न करने की बात कही, लेकिन रूटीन चेकअप और जांच के लिए आने वाले मरीजों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। स्थानीय नागरिकों और मरीजों के तीमारदारों ने प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द इन महिला कर्मचारियों की मांगों का समाधान किया जाए ताकि आम जनता को स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

प्रशासन में मचा हड़कंप, अधिकारियों ने बातचीत के लिए बुलाई बैठक

करवा चौथ के दिन महिला नर्सों द्वारा किए गए इस अनोखे और हाई-प्रोफाइल प्रदर्शन की भनक जैसे ही स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों और जिला प्रशासन को लगी, महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी नेताओं को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जल्द से जल्द प्रशासनिक स्तर पर उचित आदेश जारी किए जाएंगे। फिलहाल प्रदर्शनकारी नर्सों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी केवल कोरे आश्वासन मिले, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तीव्र करेंगी और पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का चक्का जाम कर देंगी।