Ram Mandir Trust CEO: 'नई नियुक्तियों से पुरानी गड़बड़ियां नहीं भुलाई जा सकतीं', राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO चयन पर बोले अखिलेश यादव; 'राम धन' की डकैती पर दागे तीखे सवाल

Ram Mandir Trust CEO: 'नई नियुक्तियों से पुरानी गड़बड़ियां नहीं भुलाई जा सकतीं', राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO चयन पर बोले अखिलेश यादव; 'राम धन' की डकैती पर दागे तीखे सवाल

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की प्रशासनिक व संचालन व्यवस्था को पेशेवर और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) के पद पर भारतीय वायुसेना के पूर्व फाइटर पायलट और रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति की गई है। 5,500 से अधिक आवेदनों की स्क्रीनिंग के बाद ट्रस्ट की उच्चस्तरीय बैठक में लिए गए इस बड़े फैसले पर अब उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस नियुक्ति पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया है कि केवल नई प्रशासनिक नियुक्तियां कर देने से अतीत में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं, चंदे की कथित चोरी और जमीन से जुड़े विवादों पर पर्दा नहीं डाला जा सकता।

'नई चीजें होने से क्या पुरानी बातें भूल जाएंगे?': अखिलेश का तीखा हमला

सहारनपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने ट्रस्ट के नए सीईओ चयन और नए ट्रस्टियों के शामिल होने पर सीधा तंज कसा। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट और सरकार किसे क्या जिम्मेदारी सौंपते हैं, यह उनका अपना फैसला है, लेकिन जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब भी दिया जाना जरूरी है।

सपा सुप्रीमो ने कहा, "नई चीजें होने से क्या हम पुरानी घटनाओं को भूल जाएंगे? हमें किसी व्यक्ति विशेष से कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, लेकिन सवाल आस्था और साख का है। साख से भी ऊपर आस्था होती है और आस्था पर भाजपा ने गहरी चोट पहुंचाई है। जिस तरह से राम मंदिर के दान और चढ़ावे की चोरी की घटनाएं सामने आईं, उसमें केवल छोटे व सामान्य कर्मचारियों को जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया गया, जबकि बड़े चेहरों को बचाकर क्लीन चिट दे दी गई।"

'राम धन' की डकैती रुकेगी या नहीं?

अखिलेश यादव ने दान पेटियों से जुड़े पुराने विवादों और चंदे के गबन के आरोपों को फिर से उठाते हुए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि देश भर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी गाढ़ी कमाई और अटूट श्रद्धा के साथ प्रभु श्री राम के चरणों में दान अर्पित किया था।

सपा प्रमुख ने सवाल दागा कि क्या इस नए प्रशासनिक बदलाव के बाद अब 'राम धन' पर पड़ने वाली डकैती और उसका दुरुपयोग रुकेगा? उन्होंने कहा कि जो भी नया अधिकारी इस पद पर आसीन होगा, उसके कंधों पर आस्था और भरोसे को बहाल करने की बेहद गंभीर जिम्मेदारी होगी। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि प्रभु के नाम पर आए धन की हेराफेरी करने वालों को न तो भगवान कभी माफ करेंगे और न ही देश की जनता।

अयोध्या के विकास में गरीबों और स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी का आरोप

राम मंदिर निर्माण और अयोध्या के आधुनिकीकरण के मुद्दे पर सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर मूल निवासियों और गरीबों के साथ अन्याय किया जा रहा है।

  • उन्होंने कहा कि अयोध्या को निश्चित तौर पर एक विश्वस्तरीय (World-Class) आध्यात्मिक शहर के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, लेकिन इसके पीछे मुनाफाखोरी और जमीन हथियाने की होड़ नहीं होनी चाहिए।

  • अखिलेश ने आरोप लगाया कि सत्ता के संरक्षण में अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में जमीनों के सौदों में धांधली की गई और जिन गरीबों, दुकानदारों व किसानों की जमीनें और मकान चौड़ीकरण के नाम पर तोड़े गए, उन्हें बाजार दर पर उचित मुआवजा तक नहीं दिया गया।

कौन हैं राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने जितेंद्र मिश्र?

विवादों के बीच जिस प्रशासनिक पद को लेकर यह राजनीतिक बयानबाजी हो रही है, उस पर ट्रस्ट ने एक बेहद अनुभवी सैन्य चेहरे पर दांव लगाया है:

  • 39 वर्षों का गौरवशाली सैन्य करियर: देवरिया के मूल निवासी एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्र भारतीय वायुसेना में करीब चार दशकों तक फाइटर पायलट और शीर्ष रणनीतिकार के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।

  • ऑपरेशनल कमान का अनुभव: वह वायुसेना की बेहद महत्वपूर्ण वेस्टर्न एयर कमांड (Western Air Command) के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रह चुके हैं और महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में रणनीतिक समन्वय संभाल चुके हैं।

  • भूमिका: ट्रस्ट के अनुसार, अब वह मंदिर परिसर के दैनिक प्रशासनिक कामकाज, सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय, श्रद्धालु प्रबंधन (Crowd Management), वित्तीय रिपोर्टिंग और निर्माण कार्यों की देखरेख की सीधी जिम्मेदारी संभालेंगे।

राम मंदिर के संचालन के लिए पूर्णकालिक मुख्य कार्यपालक अधिकारी की नियुक्ति के इस कदम को जहां ट्रस्ट की ओर से पारदर्शिता और सुचारु व्यवस्था की दिशा में मील का पत्थर बताया जा रहा है, वहीं मुख्य विपक्षी दल द्वारा पुराने वित्तीय विवादों और मुआवजे के सवालों को दोबारा हवा दिए जाने से राज्य में राजनीतिक तापमान एक बार फिर चढ़ गया है।