मानसून में पहाड़ों की सैर का बना रहे हैं प्लान? घर से निकलने से पहले भूलकर भी न भूलें ये 7 जरूरी चीजें, वरना ट्रिप का मजा हो जाएगा किरकिरा

मानसून में पहाड़ों की सैर का बना रहे हैं प्लान? घर से निकलने से पहले भूलकर भी न भूलें ये 7 जरूरी चीजें, वरना ट्रिप का मजा हो जाएगा किरकिरा

भारत के खूबसूरत पहाड़ी राज्यों में मानसून का मौसम अपनी एक अलग ही छटा बिखेरता है। बादलों की चादर ओढ़े पहाड़, कलकल बहती नदियां और चारों तरफ फैली हरियाली किसी भी पर्यटक का मन मोह लेने के लिए काफी होती है। यही वजह है कि साल के इस समय में बड़ी संख्या में सैलानी वीकेंड या छुट्टियों में पहाड़ों का रुख करते हैं। लेकिन शहरी भागदौड़ से दूर प्रकृति के इस आंचल में सुकून के कुछ पल बिताने जाना जितना सुखद अनुभव देता है, उतनी ही यह मौसम अपने साथ कई तरह की चुनौतियां और प्रशासनिक परेशानियां भी लेकर आता है। लगातार भारी बारिश के कारण होने वाले भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड, सड़कों पर पानी भरना, अचानक मौसम का मिजाज बदलना और रास्तों का बंद हो जाना आम बात बन जाती है। ऐसे में यदि आप बिना किसी तैयारी के या अधूरे सामान के साथ पहाड़ी सफर पर निकल पड़ते हैं, तो आपका यह सुहाना सपना एक बुरे सपने में बदल सकता है। अपनी इस यात्रा को सुरक्षित, आरामदायक और यादगार बनाने के लिए कुछ खास और जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक हो जाता है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से आसानी से निपटा जा सके।

1. वाटरप्रूफ बैग और जिप लॉक बैग (Waterproof Bags and Zip Lock Pouches)

मानसून के मौसम में पहाड़ की यात्रा के दौरान सबसे पहली और बड़ी समस्या सामान के भीगने की होती है। बारिश कब और किस रूप में आ जाए इसका कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। इसलिए अपने मुख्य बैग और पीठ पर लादे जाने वाले रकसैक को पूरी तरह वाटरप्रूफ बनाना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। साधारण बैग पानी को आसानी से सोख लेते हैं जिसके अंदर रखे कपड़े, गैजेट्स और जरूरी कागजात पूरी तरह खराब हो सकते हैं। इसके लिए अपने बैग पर वाटरप्रूफ कवर का इस्तेमाल करें या अंदर की तरफ मजबूत पॉलीथिन और जिप लॉक पाउच का उपयोग करें। मोबाइल फोन, पैसे, पहचान पत्र और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों को सुरक्षित रखने के लिए छोटे एयरटाइट जिप लॉक बैग बहुत काम आते हैं। जब आपका कीमती सामान और कपड़े पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं, तो आप बिना किसी चिंता के बारिश के इस मौसम का खुलकर आनंद उठा सकते हैं।

2. सही ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज और गमबूट (Waterproof Grip Shoes and Gumboots)

पहाड़ों पर बारिश के दिनों में रास्तों और पगडंडियों पर चलने के दौरान फिसलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। गीली मिट्टी, काई जमी चट्टानें और कीचड़ भरे रास्ते पर्यटकों के लिए बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। इसलिए ट्रेवलिंग के दौरान फैशनेबल जूते या स्नीकर्स पहनने की भूल बिल्कुल न करें। अपने साथ ऐसे मजबूत ट्रेकिंग शूज रखें जिनकी ग्रिप बेहद मजबूत हो और जो पानी को जल्दी सोखने न दें। इसके अलावा, यदि आप जंगलों, झरनों या ज्यादा बारिश वाले इलाकों में ट्रेकिंग करने का प्लान बना रहे हैं, तो एक जोड़ी गमबूट यानी रबर के लंबे जूते जरूर साथ रखें। गमबूट पानी और कीचड़ के बीच चलने के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प माने जाते हैं, जिससे आपके पैर पूरी तरह सूखे और सुरक्षित रहते हैं। पैरों की सुरक्षा और सही संतुलन ही पहाड़ी सफर को आसान बनाता है।

3. फर्स्ट एड किट और जरूरी दवाइयां (First Aid Kit and Essential Medicines)

पहाड़ी इलाकों में सफर के दौरान मौसम के अचानक बदलने से सर्दी, जुकाम, बुखार, पेट खराब होना या सिरदर्द जैसी समस्याएं आम बात हैं। इसके अलावा ऊंचे रास्तों पर कई बार लोगों को उल्टी या चक्कर आने की भी शिकायत हो जाती है। ऐसे में स्थानीय इलाकों में तुरंत डॉक्टर या मेडिकल स्टोर मिलना हमेशा संभव नहीं होता। यात्रा पर निकलने से पहले एक अच्छी और पूरी तरह से अपडेटेड फर्स्ट एड किट अपने बैग में जरूर रखें। इस किट में दर्द निवारक दवाइयां, एंटीबायोटिक्स, एंटीसेप्टिक क्रीम, बैंडेज, कॉटन, ओआरएस के पैकेट, मोशन सिकनेस की गोलियां और व्यक्तिगत रूप से ली जाने वाली आपकी कोई नियमित दवा हो तो उसे कभी न भूलें। इसके साथ ही कुछ बेसिक पट्टियां और कीड़े-मकोड़े से बचाने वाली क्रीम भी अपने पास रखना समझदारी का काम है।

4. पावर बैंक और पोर्टेबल चार्जर्स (Power Banks and Portable Chargers)

पहाड़ों पर बारिश और आंधी-तूफान के समय बिजली गुल होना एक बहुत आम समस्या है। रिमोट या ग्रामीण पहाड़ी इलाकों में कई बार घंटों तक बिजली नहीं आती है, जिससे मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बैटरी डिस्चार्ज होने का खतरा बन जाता है। आज के समय में सफर के दौरान स्मार्टफोन केवल बात करने का जरिया नहीं है, बल्कि यह नेविगेशन, ऑनलाइन पेमेंट, होटल बुकिंग और आपातकालीन संपर्कों का मुख्य साधन बन चुका है। इसलिए घर से निकलते वक्त एक अच्छी क्षमता का फुल चार्ज किया हुआ पावर बैंक और चार्जिंग केबल अपने साथ जरूर रखें। यदि आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं और कैमरे का इस्तेमाल करते हैं, तो उसकी अतिरिक्त बैटरी भी साथ रखना न भूलें ताकि बिजली न होने पर भी आप बिना किसी रुकावट के अपने सफर का आनंद लेते रहें और अपनों के संपर्क में बने रहें।

5. वाटरप्रूफ जैकेट और रेनकोट (Waterproof Jackets and Raincoats)

पहाड़ों पर मानसून के दौरान मौसम किसी की नहीं सुनता; कब तेज धूप निकल आए और कब झमाझम बारिश शुरू हो जाए, इसका कोई भरोसा नहीं होता। हर समय छाता लेकर चलना पहाड़ों की संकरी और घुमावदार सड़कों पर काफी मुश्किल हो सकता है, खासकर जब हवाएं बहुत तेज चल रही हों। इसलिए छाते के भरोसे रहने के बजाय अपने साथ एक अच्छी क्वालिटी की वाटरप्रूफ जैकेट, पोंचो या टिकाऊ रेनकोट जरूर रखें। रेनकोट या वाटरप्रूफ जैकेट पहनने से आपके हाथ पूरी तरह स्वतंत्र रहते हैं और आप आसानी से अपना सामान संभाल सकते हैं या फोटोग्राफी कर सकते हैं। इसके साथ ही अपने साथ एक जोड़ी अतिरिक्त कपड़े हमेशा ऐसी जगह रखें जो आसानी से निकाले जा सकें, ताकि बारिश में भीगने के बाद आप तुरंत सूखे कपड़े पहनकर सर्दी और ठंडक से खुद को बचा सकें।

6. ड्राई स्नैक्स और पानी की बोतल (Dry Snacks and Reusable Water Bottles)

पहाड़ों पर भारी बारिश के दौरान कई बार रास्ते घंटों के लिए बंद हो जाते हैं और लैंडस्लाइड के कारण गाड़ियां बीच रास्ते में ही फंस जाती हैं। ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों में खाने-पीने की दुकानों या ढाबों तक पहुंचना नामुमकिन हो जाता है। इसलिए अपने साथ हमेशा कुछ हाई-एनर्जी ड्राई स्नैक्स जैसे कि एनर्जी बार, चॉकलेट, बिस्कुट, नट्स और सूखे मेवे जरूर पैक करके रखें। इसके अलावा एक अच्छी क्वालिटी की इंसुलेटेड या सामान्य पानी की बोतल हमेशा अपने पास रखें, जिसमें साफ पानी भरा हो। मानसून के दिनों में खुले स्थानों का पानी पीने से पानी से होने वाली बीमारियां फैलने का खतरा बहुत अधिक होता है, इसलिए अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए हमेशा शुद्ध पानी ही पिएं। भूखे-प्यासे रहने से यात्रा की थकान और अधिक बढ़ जाती है, जिससे मानसिक तनाव भी पैदा होता है।

7. स्थानीय मौसम की जानकारी और रोड स्टेटस (Weather Updates and Road Status)

किसी भी पहाड़ी यात्रा पर रवाना होने से पहले उस क्षेत्र के स्थानीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान और सड़कों की वर्तमान स्थिति की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। कई बार जिला प्रशासन या आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा भारी बारिश और लैंडस्लाइड के रेड अलर्ट जारी किए जाते हैं, ऐसे समय में उन रास्तों पर जाना अपनी जान को जोखिम में डालने जैसा होता है। स्थानीय समाचारों, सोशल मीडिया अपडेट्स और ट्रैफिक पुलिस के हेल्पलाइन नंबरों की मदद से यह सुनिश्चित कर लें कि आप जिस रास्ते से जा रहे हैं वह सुरक्षित है या नहीं। अपनी यात्रा का शेड्यूल थोड़ा लचीला रखें ताकि यदि मौसम खराब होने के कारण आपको एक दिन रुकना भी पड़े, तो आपको किसी बड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े। सावधानी और सतर्कता ही किसी भी यात्रा को सफल और सुरक्षित बनाने की सबसे बड़ी कुंजी होती है।