US Tariff Havoc : भारत के निर्यात उद्योग की टूटी कमर, फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर, जा रहीं नौकरियां
Newsindia live,Digital Desk: US Tariff Havoc : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले ने भारत के निर्यात उद्योग को घुटनों पर ला दिया है.[1] भारत से आने वाले कई महत्वपूर्ण सामानों पर 50% का भारी-भरकम टैरिफ 27 अगस्त, 2025 से लागू हो गया है, जिसके चलते देश के कई प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में हाहाकार मचा हुआ है इस फैसले का सबसे बुरा असर उन उद्योगों पर पड़ रहा है जो श्रम-आधारित हैं और अपनी कमाई के लिए अमेरिकी बाजार पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं.
अमेरिका ने यह कदम भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने की प्रतिक्रिया के तौर पर उठाया है. व्हाइट हाउस का कहना है कि भारत की इस खरीदारी से रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय मदद मिल रही है.
फैक्ट्रियों में लटके ताले सड़कों पर
इस टैरिफ वृद्धि का असर अब जमीन पर दिखने लगा है. कपड़ा, रत्न और आभूषण, और समुद्री भोजन जैसे प्रमुख सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.
कपड़ा उद्योग: फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के मुताबिक, तिरुपुर, नोएडा और सूरत जैसे बड़े कपड़ा केंद्रों में निर्माताओं ने उत्पादन रोक दिया है.[11] 50% टैरिफ के बाद भारतीय कपड़े इतने महंगे हो गए हैं कि वे वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों के सामने प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पा रहे, जहां टैरिफ दरें बहुत कम हैं
रत्न और आभूषण: सूरत और मुंबई, जो हीरा व्यापार के बड़े केंद्र हैं, वहां भी संकट के बादल छा गए हैं. अमेरिका भारतीय आभूषणों का सबसे बड़ा खरीदार है, और इस सेक्टर में भी हजारों नौकरियां जाने का खतरा मंडरा रहा है
समुद्री उत्पाद (Seafood): विशेषकर झींगा निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में माल बेचना अब लगभग नामुमकिन हो गया है.
विश्लेषकों का अनुमान है कि इस फैसले से भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 0.5% तक की कमी आ सकती है और लाखों लोग अपनी नौकरियां खो सकते हैं.
क्या सभी उद्योगों पर है मार?
हालांकि, राहत की बात यह है कि कुछ जरूरी सेक्टरों को इस टैरिफ से छूट दी गई है. भारत के कुल निर्यात का लगभग 30% हिस्सा, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और कुछ पेट्रोलियम उत्पाद शामिल हैं, फिलहाल ड्यूटी-फ्री रहेगा. यह भारत के लिए एक बड़ी राहत है क्योंकि इन क्षेत्रों में अमेरिका के साथ हमारा व्यापार काफी मजबूत है.
लेकिन ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर दवा कंपनियां और एप्पल जैसी कंपनियां अमेरिका में उत्पादन नहीं करती हैं, तो भविष्य में उन पर भी भारी टैरिफ लगाया जा सकता है.
यह व्यापारिक तनाव भारत के लिए एक गंभीर आर्थिक चुनौती लेकर आया है. सरकार और निर्यातक मिलकर इस संकट से निकलने के रास्ते तलाश रहे हैं, लेकिन फिलहाल भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा है.