US Sanctions : SCO को बताया दिखावा, पर भारत से बोले अमेरिकी मंत्री- हम मिलकर सब सुलझा लेंगे
News India Live, Digital Desk: चीन में हुई शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में जबसे प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति पुतिन और शी जिनपिंग की दोस्ती वाली तस्वीरें सामने आई हैं, अमेरिका में बेचैनी का माहौल है. तीखी बयानबाजी और व्यापार युद्ध की धमकियों के बीच अब अमेरिका के सुर थोड़े बदलते नजर आ रहे हैं. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव (वित्त मंत्री) स्कॉट बेसेंट ने एक तरफ तो SCO शिखर सम्मेलन को "दिखावा" करार दिया, तो वहीं दूसरी तरफ भारत के साथ व्यापारिक मतभेदों को सुलझाने का भरोसा भी जताया.
इस बयान को अमेरिका की 'गुड कॉप-बैड कॉप' रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. जहां ट्रंप प्रशासन के दूसरे सलाहकार भारत को कोस रहे हैं, वहीं ट्रेजरी सचिव बातचीत का दरवाजा खुला रखने का संकेत दे रहे हैं.
'SCO की बैठक सिर्फ एक दिखावा है'
एक इंटरव्यू के दौरान जब स्कॉट बेसेंट से SCO बैठक में मोदी, जिनपिंग और पुतिन की मुलाकातों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे ज्यादा तवज्जो न देते हुए खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, "यह एक लंबे समय से चली आ रही बैठक है, जिसे शंघाई सहयोग संगठन कहा जाता है, और मुझे लगता है कि यह काफी हद तक दिखावा (performative) है."[1][2][3] उनके कहने का मतलब साफ था कि अमेरिका इस तरह की बैठकों को गंभीरता से नहीं लेता और इसे रूस-चीन का एक शक्ति प्रदर्शन मात्र मानता है.
भारत से बोले - 'दो बड़े देश हैं, मामला सुलझा लेंगे'
SCO को खारिज करने के तुरंत बाद उन्होंने भारत को लेकर नरम रुख अपना लिया. भारत-अमेरिका के बीच चल रहे तनावपूर्ण व्यापारिक रिश्तों पर उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा, "मुझे लगता है कि दिन के आखिर में, दो महान देश (भारत और अमेरिका) इसे सुलझा लेंगे.
बेसेंट ने भारत की लोकतांत्रिक साख की तारीफ करते हुए कहा, “भारत दुनिया का सबसे ज़्यादा आबादी वाला लोकतंत्र है. उनके मूल्य रूस के बजाय हमारे और चीन के ज़्यादा करीब हैं.” हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता में धीमी प्रगति भी एक कारण है कि व्हाइट हाउस ने टैरिफ बढ़ाने का कदम उठाया
रूसी तेल पर नाराजगी अब भी बरकरार
हालांकि, दोस्ती की बात करते हुए भी बेसेंट अपनी मुख्य नाराजगी जताना नहीं भूले. उन्होंने भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने और उसे बेचकर मुनाफा कमाने के मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर की. उन्होंने साफ कहा, “रूसी तेल खरीदने और फिर उसे दोबारा बेचने के मामले में भारतीय अच्छे अभिनेता नहीं रहे हैं, जिससे यूक्रेन में रूसी युद्ध के प्रयास को पैसा मिल रहा है.
कुल मिलाकर, स्कॉट बेसेंट का बयान अमेरिका की उस उलझन को दिखाता है, जहां वह भारत को एक अहम रणनीतिक साझेदार के रूप में खोना भी नहीं चाहता, लेकिन रूस के साथ उसकी बढ़ती नजदीकी से नाराज भी है. अमेरिका का संदेश साफ है - व्यापारिक मतभेद सुलझाए जा सकते हैं, लेकिन भारत को यह तय करना होगा कि वह किसके साथ खड़ा है.