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March 19 2026 06:09 am

US-Iran Tension: ईरान पर हमले की तैयारी, लेकिन 1 लाख करोड़ के अमेरिकी जंगी जहाज का 'टॉयलेट' हुआ जाम! बदबू से बेहाल हुए सैनिक

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वाशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच महायुद्ध के बादल घने होते जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'अगले 10 दिन' का सख्त अल्टीमेटम दे दिया है। लेकिन इस भीषण तनाव और युद्ध की तैयारियों के बीच दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना एक ऐसी हास्यास्पद और अजीबोगरीब मुसीबत में फंस गई है, जिसे सुनकर आप अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे। अमेरिका का सबसे अत्याधुनिक और 13 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये) की लागत से बना परमाणु ऊर्जा चालित सुपरकैरियर 'USS गेराल्ड आर. फोर्ड' (USS Gerald R. Ford) इस वक्त समंदर में दुश्मनों से नहीं, बल्कि अपने ही 'टॉयलेट' से जंग लड़ रहा है। इस महाकाय जहाज का सीवेज सिस्टम पूरी तरह से फेल हो चुका है।

तकनीक ने दिया धोखा, 4 दिन में 205 बार चोक हुए टॉयलेट

एनपीआर (NPR) और अन्य वैश्विक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पानी बचाने के मकसद से इस सुपरकैरियर में क्रूज जहाजों वाली एडवांस 'वैक्यूम तकनीक' का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन यह दांव नौसेना पर ही भारी पड़ गया। जहाज पर मौजूद 4,600 से ज्यादा सैनिकों और क्रू मेंबर्स के हिसाब से टॉयलेट के पाइप बेहद संकरे और पतले साबित हो रहे हैं। हालात इतने बदतर हैं कि महज 4 दिनों के भीतर जहाज के सीवेज सिस्टम में 205 बार खराबी दर्ज की गई। अब आलम यह है कि दुश्मनों पर नजर रखने के बजाय जहाज के इंजीनियर 19-19 घंटे तक जाम हुए पाइपों को खोलने और गंदगी साफ करने की ड्यूटी कर रहे हैं।

सफाई का खर्च सुनकर उड़ जाएंगे होश, एक बार के लगते हैं 3.3 करोड़

अगर आपको लग रहा है कि यह आम घरों की तरह किसी प्लंबर के ठीक करने का काम है, तो आप गलत हैं। फोर्ब्स (Forbes) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन संकरे पाइपों में जमी भयंकर गंदगी को साफ करने के लिए एक विशेष 'एसिड फ्लश' (Acid Flush) प्रक्रिया का इस्तेमाल करना पड़ता है। हैरान करने वाली बात यह है कि सिर्फ एक बार इस एसिड फ्लश को करने का खर्च 4 लाख डॉलर (करीब 3.3 करोड़ रुपये) आता है। साल 2025 में ही इस टॉयलेट समस्या से निपटने के लिए बाहरी तकनीकी विशेषज्ञों को 32 बार जहाज पर बुलाना पड़ा था।

ईरान से युद्ध का साया और बदबू से टूटता सैनिकों का मनोबल

एक तरफ ईरान से युद्ध का बिगुल बजने वाला है, तो दूसरी तरफ बीच समंदर में अमेरिकी सैनिक टॉयलेट के ओवरफ्लो और असहनीय बदबू से त्रस्त हैं। यह वही जंगी जहाज है जिसने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई थी और यह लंबे समय से समंदर में ही तैनात है। बार-बार तैनाती बढ़ने और अब टॉयलेट की इस भयानक समस्या के कारण सैनिकों का मनोबल बुरी तरह टूट रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि 1 लाख करोड़ रुपये के जहाज पर ऐसी बुनियादी समस्या सैनिकों के अंदर भारी चिड़चिड़ापन और निराशा पैदा कर रही है।

नौसेना बोली- 'फाइटिंग पावर' पर नहीं पड़ेगा कोई असर

सोशल मीडिया पर इस खबर के वायरल होने और फजीहत के बाद अमेरिकी नौसेना ने सफाई दी है। नौसेना का दावा है कि टॉयलेट की इस समस्या का जहाज की 'फाइटिंग पावर' या युद्ध क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, ट्रंप की 10 दिनों वाली चेतावनी और जिनेवा में होने वाली अहम बातचीत के बीच इस खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। ट्रंप साफ कह चुके हैं कि अगर ईरान के साथ 'सही डील' नहीं हुई तो नतीजे बहुत भयानक होंगे। अब देखना यह है कि अमेरिका का यह सबसे महंगा जहाज ईरान से कैसे निपटता है।