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March 18 2026 06:35 pm

UP Politics : बाराबंकी में महासंग्राम चंद्रशेखर का पलटवार चमड़ा उतारना भी जानते हैं और उसका जूता बनाकर मारना भी'

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News India Live, Digital Desk: 15 मार्च को बाराबंकी में आयोजित रैली से पहले ही माहौल तनावपूर्ण था। करणी सेना और भीम आर्मी के कार्यकर्ता आमने-सामने थे, जिसके चलते भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

विवाद की शुरुआत: करणी सेना की चुनौती

करणी सेना के प्रदेश महामंत्री अभिनव सिंह ने एक वीडियो जारी कर चंद्रशेखर आजाद को खुली चुनौती दी थी।

धमकी: अभिनव सिंह ने कहा था कि "चंद्रशेखर को बाराबंकी की धरती पर कदम नहीं रखने दिया जाएगा। वह अपने पैरों पर आएंगे तो जरूर, लेकिन अपने पैरों पर वापस जा नहीं पाएंगे।"

आरोप: करणी सेना का आरोप था कि चंद्रशेखर हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं और सवर्ण समाज के खिलाफ जहर उगलते हैं।

चंद्रशेखर आजाद का 'चमड़ा और जूता' वाला बयान

धमकियों के बीच भारी सुरक्षा और समर्थकों की भीड़ के साथ बाराबंकी पहुँचे चंद्रशेखर आजाद ने मंच से अपने जूतों की ओर इशारा करते हुए बेहद आक्रामक अंदाज में जवाब दिया:

"मैं आज चमड़े की चप्पल पहनकर आया हूँ। कुछ लोग कह रहे हैं कि पैर तोड़ देंगे, घुसने नहीं देंगे। मैं उन्हें बता देना चाहता हूँ कि हम चमड़ा उतारना भी जानते हैं और उसका जूता बनाना भी जानते हैं। और समय आने पर उसी जूते को सिर पर पटककर मारना भी हमें आता है।"

उन्होंने आगे कहा कि वह संविधान और कानून को मानने वाले व्यक्ति हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे किसी की गुंडागर्दी से डर जाएंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके काफिले पर पत्थर फेंकने की कोशिश की गई, जो यूपी की कानून-व्यवस्था पर एक तमाचा है।

रैली के मुख्य बिंदु:

भीम आर्मी का शक्ति प्रदर्शन: करणी सेना की धमकी के बाद भीम आर्मी के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में लाठी-डंडे लेकर रैली में पहुँचे थे।

संवैधानिक रास्ता: तीखे तेवरों के बावजूद चंद्रशेखर ने अपने समर्थकों से अपील की कि वे किसी के उकसावे में न आएं और हिंसा या असंवैधानिक रास्ता न अपनाएं।

राजनीतिक संदेश: चंद्रशेखर ने स्पष्ट किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए उनके गठबंधन के दरवाजे (बीजेपी को छोड़कर) सभी के लिए खुले हैं।