UP Panchayat Election 2026 : यूपी पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त, क्या 26 मई तक बन जाएगी गांव की सरकार
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगामी पंचायत चुनावों की समयसीमा को लेकर राज्य सरकार और चुनाव आयोग से कड़ा सवाल पूछा है। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद प्रशासन अब एक्शन मोड में नजर आ रहा है। आइए जानते हैं कि आखिर कब तक यूपी में ग्राम प्रधान और जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव संपन्न हो सकते हैं।
हाईकोर्ट ने मांगा 25 मार्च तक पूरा 'चुनावी रोडमैप'
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि क्या 26 मई 2026 तक नई पंचायतों का गठन संभव है? अदालत ने इस मामले में विस्तृत जानकारी मांगते हुए 25 मार्च की तारीख तय की है। कोर्ट की सख्ती का सीधा मतलब है कि अब चुनाव टालने की गुंजाइश कम होती जा रही है।
26 मई की डेडलाइन का क्या है गणित?
उत्तर प्रदेश में वर्तमान ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 25 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। नियमों के मुताबिक, कार्यकाल खत्म होने से पहले ही नए जनप्रतिनिधियों का चुनाव हो जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने पड़ेंगे, जिससे विकास कार्यों में बाधा आ सकती है। इसी संवैधानिक संकट से बचने के लिए कोर्ट ने समय पर प्रक्रिया पूरी करने पर जोर दिया है।
ओबीसी आरक्षण और पिछड़ा वर्ग आयोग का पेच
चुनावों में देरी की एक बड़ी वजह पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण का निर्धारण भी हो सकती है। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया है कि समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की प्रक्रिया गतिमान है। जब तक आयोग की रिपोर्ट नहीं आती और ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक सीटों का आरक्षण तय करना मुश्किल होगा। सरकार इसी तकनीकी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए समय की मांग कर रही है।
जमीनी स्तर पर तैयारियां शुरू: मतपत्र और वोटर लिस्ट
भले ही तारीखों का आधिकारिक एलान अभी नहीं हुआ है, लेकिन विभागीय स्तर पर काम तेज है:
मतपत्रों का रंग: जानकारी के मुताबिक, ग्राम प्रधान के लिए हरे, सदस्य के लिए सफेद, बीडीसी के लिए नीले और जिला पंचायत सदस्य के लिए गुलाबी रंग के मतपत्रों का उपयोग किया जा सकता है।
वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण: फर्जी वोटों को हटाने और नए युवाओं का नाम जोड़ने के लिए मतदाता सूची के अपडेशन का काम भी रफ़्तार पकड़ चुका है।
क्या समय पर हो पाएंगे चुनाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर 25 मार्च तक सरकार कोर्ट में ठोस योजना पेश कर देती है, तो अप्रैल-मई 2026 में वोटिंग की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि, सब कुछ ओबीसी आरक्षण की रिपोर्ट और कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। फिलहाल, गांवों में चुनावी माहौल अभी से गरमाने लगा है।