Bihar Politics : रमजान में मुस्लिम सम्मान पर छिड़ी जंग तेजस्वी के सवाल पर JDU का पलटवार, राजद विधायक फैसल रहमान चर्चा में
News India Live, Digital Desk: बिहार की सियासत में रमजान के पवित्र महीने के बीच 'मुस्लिम सम्मान' को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। आरजेडी (RJD) नेता तेजस्वी यादव द्वारा उठाए गए सवालों के बाद अब जेडीयू (JDU) ने करारा जवाब दिया है। इस पूरे विवाद के केंद्र में ढाका के आरजेडी विधायक फैसल रहमान का एक बयान है, जिसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं।
तेजस्वी यादव का सवाल: रमजान में कहां है सम्मान?
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने हाल ही में मुस्लिम समुदाय की स्थिति और उनके राजनीतिक सम्मान को लेकर सरकार को घेरा था। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि एनडीए शासन में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और उनके मान-सम्मान के साथ समझौता किया जा रहा है। उन्होंने खास तौर पर रमजान के समय में समुदाय की सुरक्षा और भागीदारी पर सवाल खड़े किए।
JDU का तीखा हमला: "वोट बैंक की राजनीति छोड़ें तेजस्वी"
तेजस्वी के आरोपों पर पलटवार करते हुए जेडीयू प्रवक्ताओं ने कहा कि आरजेडी केवल चुनाव और रमजान के वक्त ही अल्पसंख्यकों की याद आती है। जेडीयू ने राजद विधायक फैसल रहमान के संदर्भ में कहा कि आरजेडी के भीतर ही कई नेता घुटन महसूस कर रहे हैं। सत्ता पक्ष का दावा है कि नीतीश कुमार के शासन में 'न्याय के साथ विकास' हुआ है और सभी धर्मों का समान सम्मान सुनिश्चित किया गया है।
विधायक फैसल रहमान और राजद के भीतर की हलचल
खबरों के मुताबिक, आरजेडी विधायक फैसल रहमान के कुछ हालिया रुख ने पार्टी के भीतर भी चर्चा छेड़ दी है। जेडीयू का आरोप है कि तेजस्वी यादव अपने ही विधायकों का विश्वास खो रहे हैं और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए 'इमोशनल कार्ड' खेल रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या रमजान के बाद बिहार की राजनीति में कोई नया समीकरण देखने को मिलेगा?
मुस्लिम वोट बैंक पर कब्जे की होड़
बिहार की राजनीति में मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण हमेशा से निर्णायक रहा है। 2026 के राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए, चाहे वह ओवैसी की पार्टी (AIMIM) हो, प्रशांत किशोर की जन सुराज या जेडीयू-बीजेपी गठबंधन, हर कोई इस बड़े वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में है। तेजस्वी का 'मुस्लिम सम्मान' वाला कार्ड इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
जनता की राय और सोशल मीडिया पर बहस
सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा काफी गर्म है। जहां आरजेडी समर्थक इसे हक की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं विपक्षी इसे 'तुष्टिकरण' करार दे रहे हैं। इफ्तार पार्टियों के बीच शुरू हुई यह सियासी जंग आने वाले दिनों में और तेज होने की उम्मीद है।