EPS-95 Pension Update: न्यूनतम पेंशन बढ़ाने पर सरकार का रुख साफ; 'हायर पेंशन' और ड्यूज जमा करने की डेडलाइन पर भी दी बड़ी जानकारी
नई दिल्ली। पिछले काफी समय से ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये करने की मांग देश भर में हो रही है। इस मुद्दे पर संसद में सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन द्वारा पूछे गए तीखे सवालों का जवाब देते हुए सरकार ने फिलहाल पेंशन राशि में किसी भी तत्काल बढ़ोतरी से इनकार कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि पेंशन फंड की स्थिरता (Sustainability) और भविष्य की देनदारियों को देखते हुए ही कोई फैसला लिया जा सकता है।
सरकार का तर्क: क्यों नहीं बढ़ रही न्यूनतम पेंशन?
श्रम मंत्री ने सदन को बताया कि ईपीएस-95 एक "डिफाइंड कंट्रीब्यूशन-डिफाइंड बेनिफिट" योजना है। इसका मतलब है कि जितना योगदान जमा होता है, उसी के आधार पर लाभ दिए जाते हैं।
फंडिंग का गणित: इस फंड में एम्प्लॉयर (नियोक्ता) कर्मचारी की सैलरी का 8.33% हिस्सा देता है, जबकि केंद्र सरकार 1.16% का योगदान (15,000 रुपये तक की सैलरी पर) देती है।
बजटीय सहायता: सरकार ने कहा कि वह पहले से ही हर महीने 1,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित करने के लिए अलग से बजटीय सहायता दे रही है।
वित्तीय भार: सरकार का मानना है कि बिना अतिरिक्त फंडिंग के पेंशन राशि बढ़ाने से पेंशन फंड के लंबे समय तक चलने पर संकट आ सकता है।
हायर पेंशन (Higher Pension) पर ताजा अपडेट
सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2022 के ऐतिहासिक फैसले के बाद 'ज्यादा सैलरी पर ज्यादा पेंशन' चुनने वालों के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए:
आवेदन की स्थिति: 31 जनवरी 2025 तक लगभग 15.24 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे।
प्रोसेसिंग: 9 मार्च 2026 तक 99.2% से अधिक आवेदनों का निपटारा किया जा चुका है।
PPO जारी: जो लोग रिटायर हो चुके हैं और अपना बकाया (Arrears) जमा कर चुके हैं, उनके लिए पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) जारी किए जा रहे हैं। वर्तमान कर्मचारियों को 58 वर्ष की आयु के बाद क्लेम फाइल करने पर PPO मिलेगा।
बकाया जमा करने की समयसीमा (Deadline for Dues)
पेंशनभोगियों के बीच इस बात को लेकर भ्रम था कि क्या उन्हें बकाया राशि जमा करने के लिए और समय मिलेगा? सरकार ने स्पष्ट किया:
नियम: डिमांड लेटर (Demand Letter) जारी होने के महीने से तीन कैलेंडर महीनों के भीतर ही पैसा जमा करना होगा। फिलहाल इस समयसीमा को आगे बढ़ाने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है।
क्यों असंतुष्ट हैं पेंशनर्स?
पेंशनर्स एसोसिएशन का तर्क है कि मौजूदा महंगाई के दौर में 1,000 रुपये प्रति माह की राशि "सम्मानजनक जीवन" जीने के लिए नाकाफी है। हाई एम्पावर्ड मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों को लागू न करने और पेंशन रिविजन की मांग को टालने से देशभर के बुजुर्गों में निराशा है।