UP Electricity : उत्तर प्रदेश में महंगी होगी बिजली? कंपनियों ने मांगा 20% का इजाफा

Post

News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं पर महंगाई की एक और मार पड़ने वाली है। प्रदेश की बिजली कंपनियों (Discoms) ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बिजली दरों में लगभग 18 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के सामने पेश किया है। आयोग ने इस प्रस्ताव को 'सशर्त' मंजूरी दे दी है, जिसके बाद अब गेंद जनता के पाले में है।

कंपनियों ने क्यों मांगी दरें बढ़ाने की इजाजत?

पावर कॉरपोरेशन और अन्य वितरण कंपनियों ने अपनी 'वार्षिक राजस्व आवश्यकता' (ARR) रिपोर्ट में लगभग 12,453 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा (Revenue Gap) दिखाया है। कंपनियों का तर्क है कि बिजली खरीद की लागत बढ़ने और स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के संचालन पर होने वाले भारी खर्च (करीब ₹3,837 करोड़) की भरपाई के लिए दरों में बढ़ोतरी करना अनिवार्य हो गया है।

आम आदमी के पास 21 दिन का मौका

नियामक आयोग ने स्पष्ट किया है कि दरों पर अंतिम फैसला लेने से पहले उपभोक्ताओं और अन्य हितधारकों की आपत्तियां और सुझाव सुने जाएंगे।

समय सीमा: प्रस्ताव के सार्वजनिक होने के बाद से आपके पास अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए 21 दिन का समय है।

कैसे दर्ज करें आपत्ति: उपभोक्ता अपनी लिखित आपत्तियां और सुझाव डाक द्वारा या व्यक्तिगत रूप से 'विद्युत नियामक आयोग, विभूति खंड, लखनऊ' के कार्यालय में जमा कर सकते हैं।

जनसुनवाई: आपत्तियों पर विचार करने के बाद मार्च 2026 में प्रदेश के विभिन्न शहरों में जनसुनवाई (Public Hearing) आयोजित की जाएगी।

उपभोक्ता परिषद ने खोला मोर्चा

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है। उनका कहना है कि बिजली कंपनियों पर पहले से ही उपभोक्ताओं का 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस (अधिशेष) है। ऐसे में दरें बढ़ाने के बजाय अगले 5 सालों तक बिजली दरों में 8% की कमी की जानी चाहिए।

फरवरी के बिल में 10% का 'करंट'

गौरतलब है कि नियमित दरों के अलावा, फरवरी 2026 के बिजली बिल में पहले से ही 10% अतिरिक्त ईंधन अधिभार (Fuel Surcharge) वसूलने की तैयारी है। यह वसूली नवंबर में महंगी बिजली खरीद के एवज में की जा रही है, जिस पर नियामक आयोग ने भी पावर कॉरपोरेशन से जवाब तलब किया है।