कांग्रेस से शुरू किया सफर, अब बनीं मुंबई की प्रथम नागरिक जानें कौन हैं रीतू तावड़े जिन्होंने बीएमसी में रचा इतिहास

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News India Live, Digital Desk : शनिवार, 7 फरवरी 2026 को महायुति गठबंधन (BJP-शिंदे सेना) ने रीतू तावड़े को मेयर और संजय घाड़ी को डिप्टी मेयर पद का उम्मीदवार घोषित किया। बहुमत का आंकड़ा पार होने के कारण उनका चुना जाना तय है। 11 फरवरी को होने वाले आधिकारिक चुनाव के बाद वे कार्यभार संभालेंगी।

1. रीतू तावड़े का राजनीतिक सफर (From Congress to BJP)

रीतू तावड़े की पहचान एक जमीन से जुड़ी और मेहनती नेता के रूप में होती है।

शुरुआत: उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी।

बीजेपी में शामिल: साल 2012 में वे कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुईं। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

जीत की हैट्रिक: वे घाटकोपर इलाके से लगातार तीसरी बार पार्षद चुनी गई हैं। उन्होंने वार्ड संख्या 121, 127 और अब 2026 में वार्ड संख्या 132 से जीत दर्ज की है।

2. क्यों चुना गया उन्हें मेयर? (Key Reasons)

बीजेपी ने कई अनुभवी नामों (जैसे शीतल गंभीर और राजश्री शिरवाडकर) के बीच रीतू तावड़े पर भरोसा जताया, इसके पीछे कुछ ठोस कारण हैं:

मराठा चेहरा और गुजराती वोट: रीतू तावड़े मूल रूप से मराठा समुदाय (क्षत्रिय मराठा) से आती हैं, लेकिन उनकी पकड़ गुजराती बाहुल्य वाले वार्डों में भी बहुत मजबूत है। बीजेपी ने उनके जरिए एक 'समावेशी' चेहरा पेश किया है।

प्रशासनिक अनुभव: वे बीएमसी की सबसे महत्वपूर्ण समितियों में से एक, 'शिक्षा समिति' (Education Committee) की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्हें नगर निगम के कामकाज की गहरी समझ है।

बेदाग छवि: वे वर्तमान में महाराष्ट्र प्रदेश बीजेपी महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं और उनकी छवि एक जुझारू कार्यकर्ता की रही है।

3. बीएमसी का नया गणित (2026)

227 सदस्यीय बीएमसी में सत्ता परिवर्तन का मुख्य कारण महायुति का गठबंधन है:

महायुति (118 सीटें): बीजेपी (89) + शिवसेना-शिंदे गुट (29)। बहुमत के लिए 114 सीटें चाहिए थीं।

विपक्ष: शिवसेना-UBT (65), कांग्रेस (24), और मनसे (6)।

4. डिप्टी मेयर: संजय घाड़ी (Sanjay Ghadi)

गठबंधन की शर्तों के अनुसार, डिप्टी मेयर का पद एकनाथ शिंदे की शिवसेना को मिला है। संजय शंकर घाड़ी (वार्ड नंबर 5) इस पद के लिए चुने गए हैं। वे पहले उद्धव ठाकरे गुट में थे, लेकिन 2022 के विद्रोह के बाद शिंदे गुट में शामिल हो गए थे।