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March 14 2026 01:09 am

सोनू हत्याकांड पर रार मुजफ्फरनगर जाने से रोके गए यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, बॉर्डर पर नोकझोंक

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News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गर्मी बढ़ गई है। मामला मुजफ्फरनगर का है, जहां एक युवक 'सोनू' की हत्या (Sonu Murder Case) के बाद से ही माहौल काफी संवेदनशील बना हुआ है। इसी बीच, आज जब यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय (Ajay Rai) पीड़ित परिवार का दर्द बांटने वहां जा रहे थे, तो उन्हें मुजफ्फरनगर में घुसने से पहले ही रोक दिया गया।

बॉर्डर पर ही लगा ब्रेक

खबरों के मुताबिक, अजय राय अपने समर्थकों के काफिले के साथ मुजफ्फरनगर की तरफ बढ़ रहे थे। उनका मकसद मृतक सोनू के परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना देना था। लेकिन, पुलिस प्रशासन पहले से ही मुस्तैद था। मुजफ्फरनगर बॉर्डर और खतौली के पास पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी। जैसे ही कांग्रेस नेता का काफिला वहां पहुंचा, पुलिस अधिकारियों ने उन्हें आगे जाने की इजाजत देने से साफ मना कर दिया।

पुलिस का तर्क: "माहौल बिगड़ सकता है"

प्रशासन ने अजय राय को रोकने के पीछे धारा 144 (Section 144) लागू होने का हवाला दिया। पुलिस का कहना था कि इलाके में अभी शांति व्यवस्था बनाए रखना चुनौती है और किसी भी राजनीतिक नेता के आने से भीड़ इकठ्ठा हो सकती है, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। इसलिए सुरक्षा के लिहाज से उन्हें इजाजत नहीं दी जा सकती।

अजय राय ने बताया लोकतंत्र की हत्या

पुलिस की इस कार्रवाई से अजय राय और कांग्रेस कार्यकर्ता बेहद खफा नज़र आए। सड़क पर ही पुलिस और नेताओं के बीच काफी देर तक तीखी बहस और नोकझोंक होती रही। अजय राय ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एक विपक्ष के नेता के तौर पर उनका काम है पीड़ितों के आंसू पोंछना। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए विपक्ष की आवाज को दबा रही है। उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार को किस बात का डर है जो उन्हें पीड़ित परिवार से मिलने नहीं दिया जा रहा?

राजनीतिक तापमान बढ़ा

फिलहाल मुजफ्फरनगर में इस हत्या कांड को लेकर तनाव तो है ही, साथ ही अब इस पर सियासी रोटियां भी सिंकने लगी हैं। एक तरफ प्रशासन का कहना है कि वे लॉ एंड ऑर्डर संभाल रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे तानाशाही बता रहा है। अजय राय को रोके जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।

अब देखना होगा कि प्रशासन उन्हें कब तक अनुमति देता है, या फिर यह मुद्दा लखनऊ से लेकर दिल्ली तक और तूल पकड़ेगा। आप इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या ऐसे समय में नेताओं को जाने की इजाजत मिलनी चाहिए या प्रशासन का फैसला सही था?