UP Budget 2026-27: 9 लाख करोड़ के मगा बजट की तैयारी, 11 फरवरी को खुलेगा योगी सरकार का पिटारा

Post

News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट पेश करने जा रही है। चूँकि 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए इस बजट को 'चुनावी ब्लूप्रिंट' के रूप में देखा जा रहा है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना इस बार लगभग 9 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश कर सकते हैं, जो पिछले साल के 8.08 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 10% बड़ा होगा।

बजट की वर्तमान स्थिति: कितना पास, कितना खर्च?

पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) के प्रदर्शन और आगामी लक्ष्यों का विश्लेषण कुछ इस प्रकार है:

विवरणआंकड़े (अनुमानित)
पिछला बजट आकार (2025-26)₹8,08,337 करोड़
अब तक खर्च (फरवरी 2026 तक)₹4,28,495 करोड़ (जारी राशि का 91%)
आगामी बजट अनुमान (2026-27)₹9,00,000 करोड़+
बजट पेश करने की तारीख11 फरवरी 2026 (सुबह 11 बजे)

2026-27 बजट के 5 मुख्य फोकस क्षेत्र (Allocations)

बुनियादी ढांचा (Infrastructure): बजट का सबसे बड़ा हिस्सा एक्सप्रेसवे, जेवर एयरपोर्ट के अगले चरण और मेट्रो विस्तार (लखनऊ, कानपुर, आगरा) के लिए आवंटित होने की उम्मीद है।

धार्मिक पर्यटन: अयोध्या, काशी और मथुरा के बाद अब नैमिषारण्य और विंध्याचल जैसे धार्मिक स्थलों के कायाकल्प के लिए विशेष फंड का प्रावधान होगा।

युवा और रोजगार: पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए नई तकनीक और युवाओं को टैबलेट/स्मार्टफोन वितरण के लिए बजट बढ़ाया जा सकता है।

महिला सशक्तिकरण: 'कन्या सुमंगला योजना' और महिला सुरक्षा के लिए पिंक बूथों के विस्तार पर जोर रहेगा।

कृषि: गन्ना किसानों के बकाया भुगतान और मुफ्त सिंचाई बिजली के लिए भारी आवंटन की संभावना है।

बजट सत्र का पूरा शेड्यूल (Timeline)

9 फरवरी: सत्र का शुभारंभ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का संबोधन।

11 फरवरी: वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा बजट 2026-27 का प्रस्तुतीकरण।

12-13 फरवरी: राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा और मुख्यमंत्री का जवाब।

16-19 फरवरी: विभागीय बजट (Anudan Mang) पर विस्तृत चर्चा।

20 फरवरी: बजट का पारित होना और सत्र का समापन।

रिपोर्टर की राय: क्यों खास है यह बजट?

यह बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि 'मिशन 2027' की बुनियाद है। सरकार का लक्ष्य यूपी की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाना है। केंद्र से मिलने वाले लगभग 4.26 लाख करोड़ रुपये के राज्यांश ने यूपी सरकार के हाथ और मजबूत कर दिए हैं, जिससे लोक-लुभावन घोषणाओं की उम्मीद बढ़ गई है।