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April 14 2026 10:11 am

UP Board Exam 2026 : अब चेतावनी नहीं, सीधे होगी जेल ड्यूटी से गायब रहने वाले शिक्षकों पर बोर्ड ने कसा शिकंजा

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News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने बोर्ड परीक्षाओं की सुचिता और सुचारू संचालन के लिए बड़ा फैसला लिया है। परिषद ने स्पष्ट कर दिया है कि बोर्ड परीक्षा के दौरान ड्यूटी से गायब रहने वाले शिक्षकों और कक्ष निरीक्षकों को अब कोई 'चेतावनी' नहीं दी जाएगी। ऐसे लापरवाह शिक्षकों के खिलाफ सीधे कड़ी दंडात्मक कार्रवाई और एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी।

नो मोर वॉर्निंग: बोर्ड का सख्त फरमान

अक्सर देखा जाता था कि ड्यूटी लगने के बाद कई शिक्षक बीमारी या अन्य बहानों का सहारा लेकर परीक्षा केंद्र पर नहीं पहुँचते थे। इससे परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्था प्रभावित होती थी। यूपी बोर्ड के सचिव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को निर्देश दिया है कि जो भी शिक्षक बिना किसी ठोस या पूर्व स्वीकृत कारण के ड्यूटी ज्वाइन नहीं करेगा, उसे 'अनुशासनहीनता' का दोषी माना जाएगा।

शिक्षकों पर क्या होगी कार्रवाई?

बोर्ड की नई गाइडलाइंस के मुताबिक, ड्यूटी से बचने वाले शिक्षकों पर निम्नलिखित गाज गिर सकती है:

वेतन कटौती: बिना सूचना गायब रहने पर संबंधित दिनों का वेतन काटा जाएगा।

FIR और कानूनी कार्रवाई: गंभीर मामलों में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी।

सेवा पुस्तिका में प्रविष्टि: शिक्षक की सर्विस बुक में प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) दर्ज होगी, जिससे भविष्य में पदोन्नति पर असर पड़ सकता है।

ब्लैकलिस्टिंग: ऐसे शिक्षकों को भविष्य में बोर्ड की किसी भी गोपनीय और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से बाहर किया जा सकता है।

डिजिटल मॉनिटरिंग और उपस्थिति

इस बार शिक्षकों की उपस्थिति को ट्रैक करने के लिए डिजिटल माध्यमों का भी सहारा लिया जा रहा है। परीक्षा केंद्रों पर तैनात हर शिक्षक को अपनी ड्यूटी रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर देनी होगी। इसके अलावा, राज्य स्तर पर बने कंट्रोल रूम से भी रैंडम चेकिंग की जाएगी कि शिक्षक अपनी निर्धारित सीट पर मौजूद हैं या नहीं।

क्यों जरूरी है यह सख्ती?

यूपी बोर्ड की परीक्षा दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक है। इसमें करोड़ों छात्र शामिल होते हैं। परिषद का मानना है कि परीक्षा को नकल विहीन और पारदर्शी बनाने के लिए शिक्षकों का अनुशासन में होना अनिवार्य है। इस कदम से ड्यूटी के नाम पर 'सेटिंग' करने वाले गिरोहों पर भी लगाम लगेगी।