UP BJP Minister : रायबरेली में सियासी तूफान ,क्या BJP मंत्री के बेटे कांग्रेस में जा रहे हैं? पिता ने दिया करारा जवाब
News India Live, Digital Desk: UP BJP Minister : लोकसभा चुनाव तो खत्म हो गए, लेकिन उत्तर प्रदेश की सबसे हॉट सीटों में से एक, रायबरेली में सियासी हलचल अभी भी जारी है। इस बार इस हलचल की वजह बना है एक फोटो, जिसने सोशल मीडिया पर आते ही आग लगा दी। इस तस्वीर में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के साथ जो शख्स खड़ा है, वह कोई और नहीं बल्कि चुनाव में उनके खिलाफ़ ताल ठोकने वाले यूपी के बीजेपी सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के बेटे पीयूष प्रताप सिंह हैं।
जैसे ही यह तस्वीर सामने आई, सोशल मीडिया पर अटकलों का बाज़ार गर्म हो गया। लोग तरह-तरह की बातें बनाने लगे। क्या मंत्री जी के बेटे कांग्रेस की तरफ देख रहे हैं? क्या परिवार में कोई राजनीतिक खींचतान चल रही है?
इस सियासी तूफ़ान को बढ़ता देख, दिनेश प्रताप सिंह खुद सामने आए और एक लंबी-चौड़ी फेसबुक पोस्ट के ज़रिए इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी और अटकलें लगाने वालों को करारा जवाब दिया।
"विरोध राजनीतिक है, व्यक्तिगत शत्रुता नहीं"
दिनेश प्रताप सिंह ने अपनी पोस्ट में साफ किया कि यह मुलाकात किसी राजनीतिक मतलब से नहीं, बल्कि रायबरेली के संस्कारों और विकास के मुद्दों को लेकर हुई थी। उन्होंने लिखा कि यह उनके दिए हुए संस्कार और रायबरेली की परंपरा है कि वे अपने से बड़ों का सम्मान करते हैं, भले ही वे राजनीतिक विरोधी ही क्यों न हों।
उन्होंने बताया कि उनका बेटा रायबरेली के सांसद (राहुल गांधी) से क्षेत्र के विकास कार्यों, जैसे कि फुरसतगंज एयरपोर्ट के विस्तारीकरण और किसानों के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए मिला था।
विरोधियों पर कसा तीखा तंज
दिनेश प्रताप सिंह ने इस मौके पर अपने विरोधियों पर एक तंज भी कसा। उन्होंने लिखा कि कुछ लोग चुनाव हारने के बाद गालियां देते हैं और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं, जबकि उनका परिवार और उनके समर्थक विरोधियों का भी सम्मान करना जानते हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में जोर देकर कहा, "यह भाजपा के संस्कार हैं कि हम अपने से बड़ों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते हैं।"
उन्होंने अपनी बात को खत्म करते हुए लिखा कि उनका विरोध राहुल गांधी या कांग्रेस से राजनीतिक स्तर पर है, कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है।
दिनेश प्रताप सिंह के इस पोस्ट के बाद सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ हो गई है कि उन्होंने बड़ी ही समझदारी से इस एक तस्वीर से उपजे विवाद को अपने संस्कारों और राजनीतिक मूल्यों को प्रदर्शित करने के अवसर में बदल दिया।