UNSC Resolution : ईरान के खिलाफ UN में भारत का मास्टरस्ट्रोक, GCC देशों पर हमले की निंदा वाले प्रस्ताव का किया समर्थन
News India Live, Digital Desk : मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक ऐतिहासिक और कड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। भारत ने उन 130 से अधिक देशों के साथ हाथ मिलाया है, जिन्होंने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों और जॉर्डन पर ईरान द्वारा किए गए 'अत्यधिक गंभीर' (Egregious) हमलों की निंदा करने वाले प्रस्ताव का सह-प्रायोजन (Co-sponsor) किया।
यूएन में प्रस्ताव हुआ पारित, रूस-चीन ने बनाई दूरी बुधवार (11 मार्च) को बहरीन द्वारा पेश किए गए इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में 13 वोटों के साथ पारित कर दिया गया। गौर करने वाली बात यह है कि जहाँ भारत ने खुलकर खाड़ी देशों का पक्ष लिया, वहीं परिषद के स्थायी सदस्य रूस और चीन ने इस मतदान से परहेज (Abstain) किया।
प्रस्ताव की मुख्य बातें और भारत का रुख:
हमलों पर तत्काल रोक: प्रस्ताव में ईरान से बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, यूएई और जॉर्डन पर अपने हमले तुरंत और बिना शर्त बंद करने की मांग की गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा: भारत ने उन धमकियों की भी कड़ी निंदा की है, जिनमें ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की चेतावनी दी थी। भारत के लिए यह मार्ग ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
नागरिक सुरक्षा पर चिंता: भारत ने आवासीय क्षेत्रों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों पर गहरी चिंता जताई है।
भारत के इस फैसले के क्या हैं मायने? कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, भारत का यह कदम सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देशों के साथ उसकी बढ़ती नजदीकी का स्पष्ट संकेत है। इन देशों में करीब 90 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं और भारत की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा यहीं से पूरा होता है। ईरान के साथ पारंपरिक दोस्ती के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और अपने नागरिकों के हितों को देखते हुए भारत ने इस बार कड़ा रुख अपनाना बेहतर समझा।
पैनिक के बीच शांति की अपील भारत ने स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्र में किसी भी प्रकार की हिंसा के खिलाफ है और चाहता है कि विवादों का समाधान केवल 'संवाद और कूटनीति' (Dialogue and Diplomacy) के माध्यम से ही निकाला जाए।