Unnao Rape case : सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद कुलदीप सेंगर की बेटी का दर्दनाक ओपन लेटर
News India Live, Digital Desk : जब कानून अपना काम करता है, तो समाज के लिए वह न्याय होता है। लेकिन उस न्याय की प्रक्रिया के बीच जब किसी दोषी का परिवार सामने आता है, तो भावनाओं का एक अलग ही पहलू उभरता है। उन्नाव बलात्कार मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के मामले में आज कुछ ऐसा ही हो रहा है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने कुछ दिन पहले सेंगर को थोड़ी राहत देते हुए उनकी सजा को कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया था, जिसे साधारण भाषा में आप एक अस्थायी 'बाहर आने का रास्ता' कह सकते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी है। अब सेंगर जेल में ही रहेंगे। इसी अदालती आदेश के बाद सेंगर की बेटी, ऐश्वर्या सेंगर ने एक लंबा और भावुक खुला पत्र (Open Letter) लिखा है।
पत्र में क्या है ऐश्वर्या का दर्द?
ऐश्वर्या का यह खत एक बेटी के नजरिए से लिखा गया है। उन्होंने अपनी बात की शुरुआत "न्याय की उम्मीद" से की है। खत में वह पूछती हैं कि क्या मीडिया और समाज ने उनके पिता को सजा मिलने से पहले ही 'अन्याय' का शिकार नहीं बना लिया था? ऐश्वर्या का दावा है कि उनके परिवार ने पिछले कई सालों में जो मानसिक और सामाजिक यातना झेली है, उसका हिसाब कौन देगा?
उनका यह खत एक तरह से 'मीडिया ट्रायल' के खिलाफ आवाज़ उठाता है। उनका कहना है कि जहाँ एक पक्ष को पूरी सहानुभूति मिल रही है, वहीं उनके पिता और उनके परिवार के मौलिक अधिकारों को कुचल दिया गया है। पत्र में भावनाओं का वो उबाल साफ दिख रहा है जहाँ एक बेटी अपने पिता को बेगुनाह मान रही है, भले ही अदालत का फैसला कुछ भी हो।
हकीकत का दूसरा पहलू
कानूनी गलियारों में चर्चा है कि सेंगर की बेटी का यह कदम एक तरह की भावुक अपील है, जिसका मकसद समाज और न्यायपालिका का ध्यान इस ओर खींचना है कि सजा केवल दोषी को नहीं, उसके निर्दोष परिवार को भी मिलती है। लेकिन दूसरी तरफ, पीड़िता के समर्थकों का कहना है कि उन्नाव में जो हुआ, उसके बाद ऐसी दलीलों का कोई मतलब नहीं रह जाता।
क्या कहती है आज की राजनीति?
कुलदीप सेंगर एक समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति का बहुत बड़ा नाम थे। बीजेपी से निकाले जाने के बाद भी उनकी धमक कम नहीं हुई थी। लेकिन अब उनकी बेटी के इस खत ने यह साबित कर दिया है कि यह लड़ाई अब अदालती कमरों से निकलकर जज्बातों की गलियों तक आ गई है।
ऐश्वर्या ने अपने पत्र में यह भी सवाल उठाया है कि क्या कानून में मानवीय संवेदनाओं के लिए जगह है? यह पत्र आज सोशल मीडिया पर खूब साझा किया जा रहा है और लोग अपनी-अपनी विचारधारा के हिसाब से इस पर टिप्पणी कर रहे हैं।
चाहे हम किसी भी पक्ष में हों, पर एक बात तो साफ़ है इतने बड़े अपराधों के बाद जब परिवारों की ऐसी चिट्ठियाँ आती हैं, तो वे समाज के सामने कई कड़वे सवाल छोड़ जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब कुलदीप सिंह सेंगर के लिए जेल की दीवारें फिर से कड़ी हो गई हैं, और उनके परिवार की यह 'लड़ाई' डिजिटल दुनिया में तेज़ होती दिख रही है।