बनारस के सारनाथ में आस्था का अनूठा रंग जब दुनिया भर के बौद्ध भिक्षुओं ने एक सुर में मांगी शांति

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News India Live, Digital Desk : जब भी बनारस (वाराणसी) का नाम आता है, तो सबसे पहले जेहन में काशी विश्वनाथ और गंगा आरती की तस्वीर उभरती है। लेकिन आज हम आपको बनारस के दूसरे हिस्से यानी सारनाथ (Sarnath) लेकर चलते हैं, जहां आज सुबह से ही एक अलग ही रौनक़ देखने को मिल रही है।

आज सारनाथ में 'इंटरनेशनल धर्म चक्र सेरेमनी' (International Dharma Wheel Ceremony) का आयोजन किया गया, और यकीन मानिए, नज़ारा ऐसा था कि देखते ही बनता था।

मिनी वर्ल्ड बन गया सारनाथ

ऐसा लग रहा था जैसे पूरी दुनिया सिमटकर सारनाथ आ गई हो। भारत ही नहीं, बल्कि वियतनाम, थाईलैंड, श्रीलंका, म्यांमार और तिब्बत जैसे कई बौद्ध देशों के भिक्षु (Buddhist Monks) यहां इकट्ठा हुए। हर कोई अपनी पारंपरिक वेशभूषा में था। लाल, नारंगी और मैरून चोगे पहने हज़ारों भिक्षुओं को एक साथ देखना वाकई एक आध्यात्मिक अनुभव था।

विश्व शांति के लिए गूंजे मंत्र

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सिर्फ पूजा-पाठ नहीं, बल्कि दुनिया के लिए एक बड़ा सन्देश देना था। आज के समय में जब हर जगह युद्ध और तनाव का माहौल है, ऐसे में भगवान बुद्ध की इस धरती से 'विश्व शांति' (World Peace) के लिए प्रार्थना की गई।

सभी भिक्षुओं ने विशेष पूजा-अर्चना की और मोमबत्तियां जलाईं। वातावरण में गूंजता "बुद्धम शरणम गच्छामि" का मंत्र हर किसी के मन को शांति दे रहा था। इस दौरान एक भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई, जिसमें पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर भिक्षु चल रहे थे।

सारनाथ ही क्यों?

दोस्तों, आप जानते ही होंगे कि सारनाथ वो जगह है जहां भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। इसे 'धर्मचक्र प्रवर्तन' कहा जाता है। इसलिए बौद्ध धर्म को मानने वालों के लिए इस जगह का महत्त्व मक्का या काशी से कम नहीं है। हर साल ऐसे आयोजनों में दुनिया भर से पर्यटक और श्रद्धालु यहाँ खिंचे चले आते हैं।

अगर आप बनारस में हैं या जाने का प्लान कर रहे हैं, तो शाम के वक्त सारनाथ जरूर जाएं। वहां की शांति और ऊर्जा आपको शहर के शोर-शराबे से दूर एक अलग ही दुनिया में ले जाएगी।