ट्रंप की वो सीक्रेट डील जिसने मदुरो की रातों की नींद उड़ा दी, क्या अब वेनेजुएला में होने वाला है सत्ता का तख्तापलट?
News India Live, Digital Desk: जब बात किसी जिद्दी नेता को उसके पद से हटाने की हो, तो अक्सर पाबंदियाँ या युद्ध का डर दिखाया जाता है। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप का अंदाज़ कुछ अलग है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो, जो सालों से वहां की सत्ता पर काबिज हैं और अमेरिका की आंखों में चुभ रहे हैं, उन्हें अब ट्रंप ने एक बड़ा ऑफर दिया है।
खबरें आ रही हैं कि ट्रंप ने वेनेजुएला के बड़े अधिकारियों और खुद मदुरो के लिए एक तरह का 'गोल्डन एग्जिट' (सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता) तैयार किया है। आसान भाषा में कहें तो ट्रंप चाहते हैं कि मदुरो आराम से गद्दी छोड़ दें, और बदले में उन्हें भविष्य में किसी बड़ी मुसीबत या कानूनी पचड़ों से राहत दी जा सकती है।
क्या है यह ट्रंप का मास्टर स्ट्रोक?
ट्रंप का मानना है कि जबरदस्ती करने से बेहतर है कि ऐसी डील की जाए जिससे वेनेजुएला के लोगों को आज़ादी भी मिल जाए और वहां की जर्जर अर्थव्यवस्था को सुधारा जा सके। ट्रंप के इस रुख ने उन वेनेजुएलाई अधिकारियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है, जो अब तक मदुरो के पीछे एक मजबूत दीवार बनकर खड़े थे।
मदुरो का पलटवार: क्या यह आसान होगा?
जवाब देने में मदुरो भी पीछे नहीं रहे। मदुरो ने साफ़ कर दिया है कि उन्हें बाहरी दबाव मंजूर नहीं है। लेकिन अंदरूनी खबर ये है कि मदुरो के करीबी अफसरों के मन में अब डर पैदा होने लगा है। क्या होगा अगर ये डील वाकई रंग ले आए? क्या मदुरो की पकड़ अपने ही प्रशासन पर कमजोर हो रही है?
सच्चाई तो ये है कि वेनेजुएला आज जिस हाल में है, वहां जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। भुखमरी, बेरोजगारी और राजनीतिक हिंसा ने इस खूबसूरत देश को खंडहर बना दिया है। ऐसे में ट्रंप का 'ऑफर' किसी उम्मीद की किरण की तरह है या किसी बड़े जाल की शुरुआत, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन एक बात साफ़ है—ट्रंप ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे सीधी लड़ाई के बजाय सौदेबाज़ी (Dealing) से अपना काम निकालना बेहतर जानते हैं।