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March 16 2026 12:16 pm

ट्रंप का मिशन हॉर्मुज दुनिया के 7 देशों से मांगी युद्धपोत, पर एक पुराने साथी ने दिखाया ठेंगा क्या फिर लगेगा तेल की कीमतों में आग

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News India Live, Digital Desk:  वैश्विक तेल बाजार की लाइफलाइन कहे जाने वाले हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दांव खेला है। ट्रंप प्रशासन ने करीब 7 देशों का एक शक्तिशाली सैन्य गठबंधन (Coalition) बनाने की कवायद शुरू की है, जिसका मकसद ईरान के खतरे के बीच तेल टैंकरों को सुरक्षा कवच प्रदान करना है। हालांकि, इस मुहिम को तब बड़ा झटका लगा जब एक प्रमुख सहयोगी देश ने इस मिशन में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया।

क्या है ट्रंप का 'प्रोटेक्शन प्लान'? राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि जो देश हॉर्मुज से सबसे ज्यादा तेल आयात करते हैं (जैसे चीन, जापान और दक्षिण कोरिया), उन्हें अब अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "मैं मांग कर रहा हूं कि ये देश अपनी रक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेजें, क्योंकि यह उनका अपना क्षेत्र और उनकी अपनी ऊर्जा सुरक्षा है।" अमेरिका इस गठबंधन को तकनीकी सहायता और हवाई सुरक्षा (Air Support) देने का वादा कर रहा है।

इस देश ने दिया बड़ा झटका! जहाँ एक ओर ब्रिटेन ने माइन्सवीपिंग ड्रोन्स (Minesweeping Drones) भेजने पर विचार करने के संकेत दिए हैं, वहीं ऑस्ट्रेलिया ने ट्रंप की इस मांग को ठुकरा दिया है। ऑस्ट्रेलिया के परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया है कि वे इस मिशन के लिए मध्य पूर्व में कोई युद्धपोत नहीं भेजेंगे। जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों ने भी फिलहाल इस सैन्य टकराव का हिस्सा बनने से दूरी बना ली है, जिससे ट्रंप के 'ग्लोबल गठबंधन' की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

चीन पर ट्रंप का सीधा निशाना ट्रंप ने इस मुद्दे पर चीन को खास तौर पर घेरा है। उन्होंने कहा कि चीन अपनी जरूरत का 90% तेल इसी रास्ते से मंगवाता है, जबकि अमेरिका को इसकी बहुत कम जरूरत है। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि चीन और अन्य देश सहयोग नहीं करते हैं, तो वे इसे याद रखेंगे। यहाँ तक कि उन्होंने संकेत दिया कि अगर चीन मदद नहीं करता है, तो वे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली आगामी समिट को भी टाल सकते हैं।

युद्ध के मुहाने पर खड़ा हॉर्मुज ईरान ने पहले ही चेतावनी दी है कि वह 'दुश्मन' के जहाजों (खासकर अमेरिका और इजरायल) के लिए इस रास्ते को बंद रखेगा। हॉर्मुज में जारी इस गतिरोध के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। यदि ट्रंप का यह गठबंधन सफल नहीं होता है, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भीषण उछाल देखने को मिल सकता है।