ट्रंप के दावों ने बढ़ाई भारत की दोहरी टेंशन एक तरफ रूस से बिगड़ेंगे रिश्ते, दूसरी तरफ घरेलू बाजार पर संकट?

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News India Live, Digital Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच हुई फोन वार्ता के बाद भारत के लिए टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है। भारत के लिए यह एक बड़ी आर्थिक जीत है, लेकिन ट्रंप के कुछ बयानों ने नई दिल्ली के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। ट्रंप का दावा है कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा और अपने बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए 'जीरो टैरिफ' पर खोल देगा। ये दो शर्तें भारत के लिए 'दोधारी तलवार' साबित हो सकती हैं।

पहला फ्रंट: रूस के साथ 'ऑल वेदर' दोस्ती पर आंच?

ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि पीएम मोदी रूस से तेल की खरीद बंद करने पर सहमत हो गए हैं।

रूस की नाराजगी: भारत वर्तमान में अपनी जरूरत का करीब 35-40% तेल रूस से रियायती दरों पर खरीद रहा है। अगर भारत अचानक तेल खरीदना बंद करता है, तो दशकों पुरानी 'भारत-रूस' सामरिक दोस्ती में दरार आ सकती है।

तेल की कीमतें: रूस के बजाय अमेरिका से तेल खरीदना महंगा पड़ सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का जोखिम है। रूस भारत का सबसे भरोसेमंद रक्षा साझेदार भी है, ऐसे में यह 'दोस्ती' दांव पर लगी है।

दूसरा फ्रंट: 'मेक इन इंडिया' और किसानों के सामने संकट?

ट्रंप का दूसरा बड़ा दावा है कि भारत अमेरिकी उत्पादों (विशेषकर कृषि और डेयरी) पर अपने टैरिफ जीरो (0%) कर देगा।

स्थानीय उद्योगों को खतरा: यदि अमेरिकी कृषि उत्पाद, डेयरी और तकनीक बिना किसी टैक्स के भारत आएंगे, तो स्थानीय किसानों और MSME उद्योगों के लिए उनसे मुकाबला करना नामुमकिन हो जाएगा।

आत्मनिर्भर भारत बनाम अमेरिका फर्स्ट: पीएम मोदी का 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान और ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति यहाँ आपस में टकराती दिख रही है। अमेरिकी उत्पादों की बाढ़ से घरेलू बाजार को बचाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।

टैरिफ और व्यापार का नया समीकरण (फरवरी 2026)

स्थितिपहले (2025 तक)अब (डील के बाद)
US टैरिफ (भारतीय माल पर)50% (दंडात्मक सहित)18%
रूसी तेल खरीदकरीब 1.5 मिलियन बैरल/दिनघटाकर 'जीरो' करने का दावा
भारतीय टैरिफ (US माल पर)उच्च दरें (Reciprocal)शून्य (0%) करने की प्रतिबद्धता

विशेषज्ञों की राय: 'सावधानी जरूरी है'

कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत ने अब तक आधिकारिक तौर पर रूसी तेल बंद करने या जीरो टैरिफ की पुष्टि नहीं की है। पीएम मोदी ने केवल 'टैरिफ कटौती' का स्वागत किया है। इसका मतलब है कि भारत 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) बनाए रखना चाहता है, लेकिन ट्रंप का सार्वजनिक दबाव भारत को एक कठिन चौराहे पर ले आया है।