ट्रंप की बड़ी चाहत बोले मैंने कराया भारत-पाक का समझौता, तो मुझे अब तक नोबेल क्यों नहीं मिला?
News India Live, Digital Desk: डोनाल्ड ट्रंप जब भी बोलते हैं, तो कुछ ऐसा कह जाते हैं कि सुर्खियां खुद-ब-खुद बन जाती हैं। इस बार उन्होंने एक ऐसा मुद्दा छेड़ा है जो सीधा हमसे, यानी भारत और पड़ोसी देश पाकिस्तान से जुड़ा है। ट्रंप ने एक बार फिर पुराने दिनों को याद करते हुए दावा किया है कि उनके दखल की वजह से ही भारत और पाकिस्तान के बीच साल 2021 वाला 'सीजफायर' (युद्धविराम) समझौता हो पाया था। और मजे की बात यह है कि इस 'शानदार' काम के लिए वे अब खुद को नोबेल शांति पुरस्कार का हकदार बता रहे हैं।
क्या वाकई सब ट्रंप ने किया?
देखा जाए तो ट्रंप का अपना एक अलग अंदाज़ है। वे खुद को एक ऐसे 'डील मेकर' की तरह देखते हैं जो बड़े-बड़े झगड़े सुलझा सकता है। उनके हिसाब से, जब भारत और पाकिस्तान के बीच हालात बहुत खराब थे और सरहद पर गोला-बारी हो रही थी, तब उन्होंने ही दोनों देशों को मेज पर लाने की कोशिश की थी। ट्रंप का कहना है कि अगर वे बीच में न आते, तो मामला परमाणु जंग तक भी जा सकता था।
लेकिन यहाँ एक बड़ा पेंच है। भारत हमेशा से यह कहता आया है कि पाकिस्तान के साथ हमारा कोई भी मसला हो, वह 'द्विपक्षीय' है यानी हमारे और उनके बीच का है, जिसमें किसी तीसरे देश (चाहे वो अमेरिका ही क्यों न हो) की दखलंदाजी हमें मंज़ूर नहीं।
नोबेल प्राइज का 'दर्द'
ट्रंप अक्सर अपनी रैलियों में इस बात का जिक्र करते हैं कि उनके विरोधियों या पूर्व राष्ट्रपतियों को तो आसानी से नोबेल मिल गया, लेकिन उनके इतने 'महान' कामों के बावजूद उन्हें इग्नोर किया गया। वे इस बात से थोड़े खफा भी लगते हैं कि दुनिया ने उनके 'पीस मेकिंग' स्किल की उतनी सराहना नहीं की जितनी होनी चाहिए थी। उनका ये ताजा बयान उनकी इसी हसरत को बयान करता है।
इलेक्शन और क्रेडिट की राजनीति
आजकल अमेरिका में चुनावों की आहट तेज है, ऐसे में ट्रंप खुद को दुनिया के सबसे ताकतवर और समझदार नेता के तौर पर पेश करना चाहते हैं। भारत-पाकिस्तान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर क्रेडिट लेना उनकी इसी चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। उन्हें पता है कि इस मुद्दे पर जो भी कहा जाएगा, उसकी चर्चा पूरी दुनिया में होगी।
अब सवाल यह है कि क्या वाशिंगटन या स्टॉकहोम (जहां नोबेल दिया जाता है) में बैठा कोई शख्स ट्रंप की इन बातों को गंभीरता से ले रहा है? या यह सिर्फ ट्रंप का एक और चुनावी जुमला भर है? चाहे जो भी हो, ट्रंप ने एक बार फिर महफिल लूटने की कोशिश तो कर ही दी है।