ट्रंप का बड़ा यू-टर्न ईरान युद्ध की आग भड़काने का ठीकरा अपने ही रक्षा मंत्री हेगसेथ पर फोड़ा
News India Live, Digital Desk: दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ा करने वाले अमेरिका के 'ईरान मिशन' में अब घर के भीतर ही कलह शुरू हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई और तनाव का पूरा दोष अपने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) के सिर मढ़ दिया है। ट्रंप ने कैबिनेट की एक हाई-लेवल मीटिंग में सबके सामने हेगसेथ को टोकते हुए कहा, "तुम ही तो वो शख्स थे जिसने बार-बार कहा था कि चलो हमला करते हैं, अब नतीजे देखो।" ट्रंप के इस बदले हुए सुर ने वॉशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
'हॉक' बनाम 'प्रेसिडेंट': हेगसेथ की सलाह पड़ी भारी?
पेंटागन के सूत्रों के मुताबिक, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ शुरुआत से ही ईरान के खिलाफ 'कठोर सैन्य विकल्प' के सबसे बड़े पैरोकार रहे हैं। उन्हें ट्रंप प्रशासन में एक 'हॉक' (युद्ध समर्थक) नेता के रूप में देखा जाता है। ट्रंप ने अब सार्वजनिक रूप से यह संकेत दिया है कि वे ईरान के साथ सीधे युद्ध के पक्ष में नहीं थे, बल्कि उन्हें उनके सैन्य सलाहकारों ने इस रास्ते पर धकेला है। राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी जहाजों पर हमले बढ़ रहे हैं और तेल की कीमतें बेलगाम हो रही हैं।
क्या फटने वाला है हेगसेथ पर गाज?
ट्रंप की इस नाराजगी के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या पीट हेगसेथ की कुर्सी खतरे में है? ट्रंप अपनी 'फायर एंड फ्यूरी' वाली छवि के लिए जाने जाते हैं, और वे पहले भी कई बड़े अधिकारियों को एक झटके में पद से हटा चुके हैं। जानकारों का मानना है कि ट्रंप अब युद्ध की बढ़ती लागत और घरेलू मोर्चे पर हो रही आलोचना से बचने के लिए 'बलि का बकरा' खोज रहे हैं। हेगसेथ पर यह आरोप मढ़ना ट्रंप की उस रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें वे खुद को एक 'शांतिप्रिय नेता' के रूप में पेश करना चाहते हैं जो सिर्फ गलत सलाह का शिकार हुआ।
ईरान का पलटवार और अमेरिका में दहशत
ईरान ने ट्रंप के इस बयान को अपनी नैतिक जीत करार दिया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका का नेतृत्व खुद भ्रमित है और उनके पास युद्ध का कोई स्पष्ट विजन नहीं है। वहीं, अमेरिका के भीतर भी इस बयान का व्यापक असर दिख रहा है। विपक्ष (डेमोक्रेट्स) ने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा है कि राष्ट्रपति अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते। यदि युद्ध का आदेश उनके हस्ताक्षर से हुआ है, तो उसका दोष किसी मंत्री पर डालना कायरता है। इस बीच, खाड़ी देशों में तैनात अमेरिकी सैनिकों के परिवारों में भी अनिश्चितता का माहौल है।
कूटनीतिक हलचल और ट्रंप का अगला कदम
क्या ट्रंप अब ईरान के साथ बातचीत का कोई गुप्त रास्ता खोलेंगे? ट्रंप के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि वे सैन्य कार्रवाई को रोककर कूटनीतिक मेज पर वापस लौटना चाहते हैं। वे बार-बार कह रहे हैं कि उन्हें 'अनंत युद्धों' (Endless Wars) से नफरत है। अगर हेगसेथ को किनारे किया जाता है, तो यह माना जाएगा कि अमेरिका अपनी 'ईरान पॉलिसी' में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। दुनिया भर के शेयर बाजारों और तेल निर्यातकों की नजर अब व्हाइट हाउस के अगले आधिकारिक आदेश पर टिकी है।