संजय राउत की किताब अनलाइकली पैराडाइज में सनसनीखेज दावा, ED के दबाव में छूटा जगदीप धनखड़ का पद
News India Live, Digital Desk : शिवसेना (UBT) नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने अपनी नई किताब 'अनलाइकली पैराडाइज' (Unlikely Paradise) के जरिए देश की सियासत में एक नया भूचाल ला दिया है। सोमवार, 23 मार्च 2026 को दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और कपिल सिब्बल की मौजूदगी में रिलीज हुई इस किताब में राउत ने दावा किया है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जुलाई 2025 में 'स्वास्थ्य कारणों' से नहीं, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दबाव में अपने पद से इस्तीफा दिया था। राउत का आरोप है कि केंद्र सरकार धनखड़ के 'स्वतंत्र राजनीतिक निर्णयों' से नाराज थी, जिसके बाद उनके खिलाफ एक पुरानी फाइल खोल दी गई थी।
1. जयपुर की प्रॉपर्टी और विदेशी खाते का 'पेंच'
संजय राउत ने अपनी किताब (जो उनके जेल के अनुभवों पर आधारित है) में विस्तार से बताया है कि जांच एजेंसियों ने धनखड़ को घेरने के लिए क्या बिसात बिछाई थी:
आरोप: किताब के अनुसार, ऐसी खबरें थीं कि जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी ने जयपुर स्थित अपना आवास बेचा था और उस राशि का एक बड़ा हिस्सा नियमों के विरुद्ध विदेश (अमेरिका) भेज दिया था।
ED की फाइल: राउत का दावा है कि ED ने इस लेनदेन को लेकर एक विस्तृत फाइल तैयार की थी। जब धनखड़ ने मोदी सरकार की इच्छा के विरुद्ध कुछ 'स्वतंत्र कदम' (जैसे जस्टिस यशवंत वर्मा के महाभियोग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना) उठाए, तो उन्हें कथित तौर पर वह फाइल दिखाकर इस्तीफे के लिए मजबूर किया गया।
2. "पहले इनकार, फिर बेचैनी": राउत का वर्णन
राउत ने अपनी किताब के 'At the Doors of the EC and the Home of the VP' अध्याय में लिखा है कि शुरुआत में धनखड़ ने झुकने से इनकार कर दिया था।
दबाव: इसके बाद जांच एजेंसियों ने उन पर शिकंजा कसना तेज कर दिया, जिससे वे काफी 'बेचैन' नजर आने लगे थे। अंततः जुलाई 2025 में उन्होंने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे पूरा देश हैरान रह गया था।
धनखड़ की हालिया सफाई: दिलचस्प बात यह है कि 26 फरवरी 2026 को राजस्थान के चूरू में धनखड़ ने खुद स्वीकार किया था कि उन्होंने "बीमारी के कारण इस्तीफा नहीं दिया था", बल्कि वे केवल "अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता" देना चाहते थे। राउत ने इसी बयान को अपने दावों का आधार बनाया है।
3. अशोक लवासा और अमित शाह का भी जिक्र
किताब में केवल धनखड़ ही नहीं, बल्कि कई अन्य बड़े खुलासे भी किए गए हैं:
अशोक लवासा: राउत ने आरोप लगाया कि पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के घर पर छापेमारी और उनके परिवार को ED का समन इसलिए भेजा गया क्योंकि उन्होंने 2019 के चुनावों में पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ 'असहमति' (Dissent) जताई थी।
अमित शाह और बाल ठाकरे: किताब में दावा किया गया है कि गुजरात दंगों के बाद जब अमित शाह मुश्किल में थे, तब उन्होंने मातोश्री जाकर बाल ठाकरे से मदद मांगी थी। राउत के अनुसार, ठाकरे के एक फोन ने अमित शाह का राजनीतिक भविष्य बदल दिया था।
4. बीजेपी का पलटवार: "यह कोरी कल्पना है"
संजय राउत के इन दावों पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। महाराष्ट्र बीजेपी के प्रवक्ता ने कहा कि जेल में रहकर लिखी गई यह किताब केवल 'फिक्शन' (कल्पना) है। उन्होंने सवाल किया कि अगर राउत के पास सबूत हैं, तो वे उन्हें सार्वजनिक क्यों नहीं करते? भाजपा का कहना है कि उच्च संवैधानिक पदों पर रहे व्यक्तियों पर इस तरह के आरोप लगाना संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश है।