अमेरिका की गद्दी सँभालने से पहले ट्रम्प का बड़ा दांव, 28 पॉइंट्स में लिखा यूक्रेन युद्ध का अंत

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News India Live, Digital Desk: अभी हाल ही में अमेरिका के चुनाव जीते डोनाल्ड ट्रम्प ने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार एक ही बात कही थी—"मैं आऊंगा, तो युद्ध रुकवा दूंगा।" बहुत से लोगों को लगा था कि यह सिर्फ चुनावी जुमला है, लेकिन रिपोर्ट्स बता रही हैं कि काम शुरू हो चुका है। खबर आ रही है कि ट्रम्प ने बहुत ही खामोशी से एक Russia-Ukraine Peace Plan को हरी झंडी दिखा दी है।

इस प्लान की सबसे खास बात यह है कि यह कोई छोटी-मोटी बातचीत का प्रस्ताव नहीं है, बल्कि एक 28-सूत्रीय (28-point) ठोस रणनीति है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर चल क्या रहा है।

क्या है ट्रम्प का यह 'सीक्रेट' प्लान?

मीडिया में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, ट्रम्प का यह प्लान एक पुराने और भरोसेमंद थिंक टैंक (रणनीतिकार समूह) द्वारा तैयार किया गया है। इसे 'Project Esther' जैसे नामों से भी जोड़ा जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

इस 28-पॉइंट के फॉर्मूले का मकसद सिर्फ एक है—शांति वार्ता की मेज पर दोनों देशों को जबरदस्ती बिठाना। ट्रम्प का तरीका पुराने राष्ट्रपतियों से थोड़ा अलग है। वे 'बातों' से ज्यादा 'दबाव' में विश्वास रखते हैं। माना जा रहा है कि इस प्लान में यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य मदद को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी, अगर यूक्रेन बात नहीं मानेगा तो मदद रोकी जा सकती है, और अगर रूस नहीं मानेगा तो मदद दोगुनी की जा सकती है।

जेलेंस्की और पुतिन के लिए इसका क्या मतलब है?

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के लिए यह खबर थोड़ी चिंताजनक हो सकती है। डर यह है कि कहीं शांति के बदले यूक्रेन को अपनी कुछ जमीन न खोनी पड़ जाए। ट्रम्प की नीति "America First" की रही है, और वे इस युद्ध पर अमेरिकी पैसा पानी की तरह बहाने के मूड में कतई नहीं हैं।

दूसरी तरफ, व्लादिमीर पुतिन इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। अगर ट्रम्प का यह प्लान रूस की सुरक्षा की गारंटी देता है, तो शायद मॉस्को भी युद्ध रोकने पर विचार करे। यह प्लान एक तरह से "गाजर और छड़ी" (Carrot and Stick) वाली नीति है—मान जाओ तो फायदा, नहीं तो नुकसान।

दुनिया की नजरें ट्रम्प की अगली चाल पर

अभी तक ट्रम्प ने व्हाइट हाउस की कुर्सी नहीं संभाली है, लेकिन उनकी टीम अभी से ही जियो-पॉलिटिक्स (भू-राजनीति) की बिसात बिछाने लगी है। यह 28-सूत्रीय योजना अगर वाकई जमीन पर उतरती है, तो इसके नतीजे बहुत चौंकाने वाले होंगे। यूरोप के देश भी सहमे हुए हैं कि अगर अमेरिका ने हाथ खींच लिया, तो यूक्रेन की सुरक्षा का क्या होगा।

फिलहाल तो सब कयास लगा रहे हैं, लेकिन इतना तय है कि ट्रम्प का यह कार्यकाल शांत नहीं रहने वाला। क्या वो वाकई 'शांतिदूत' बनकर इस खून-खराबे को रोक पाएंगे? यह देखना बहुत दिलचस्प होगा।