भारत और दुनिया के लिए मंडरा रहा जल संकट का बड़ा साया, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी
उत्तराखंड की खूबसूरत, सर्द और गगनचुंबी हिमालयी चोटियों को फतह करने का सपना देखने वाले एडवेंचर प्रेमियों के लिए एक बेहद जरूरी और जीवन बचाने वाली चेतावनी सामने आ रही है। पहाड़ों की ऊंचाइयों तक पहुंचना और ग्लेशियरों के बीच से गुजरना जितना रोमांचक और साहस से भरा अनुभव होता है, उतनी ही उसमें जिंदगी दांव पर लगने की संभावना भी बनी रहती है। अक्सर सैलानी या नए ट्रेकर्स जोश में आकर पहाड़ों की बुनियादी सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे एक छोटी सी लापरवाही उनके लिए जानलेवा साबित हो जाती है। इस गंभीर विषय पर 'लोकल 18' ने उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के जाने-माने और अनुभवी पर्वतारोही भुवन चौबे से विशेष बातचीत की है। भुवन चौबे ने हिमालयी ट्रेकिंग के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में ऐसे अहम खुलासे किए हैं, जिन्हें हर पर्वतारोही को अपनी यात्रा शुरू करने से पहले गांठ बांध लेना चाहिए।
ट्रेक पर जाने से पहले शारीरिक क्षमता और मौसम का आकलन है सबसे जरूरी, भुवन चौबे की सलाह
पर्वतारोही भुवन चौबे का कहना है कि हिमालय की कठिन चढ़ाई पर निकलने से पहले हर ट्रेकर को अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता (Physical Fitness) का सही आकलन कर लेना चाहिए। कई बार लोग बिना तैयारी के ऊंचे ग्लेशियर ट्रेक्स पर निकल जाते हैं और बीच रास्ते में हांफने लगते हैं। इसके अलावा ट्रेक की कठिनाई का स्तर, समुद्र तल से उसकी ऊंचाई और वहां के वर्तमान मौसम के मिजाज की पूरी जानकारी जुटाना अनिवार्य है। उत्तराखंड के मौसम का कोई भरोसा नहीं होता, पल भर में धूप खिलने के बाद अचानक घना कोहरा और बर्फबारी शुरू हो सकती है। इसलिए यात्रा पर निकलने से पहले मौसम विभाग के पूर्वानुमान और स्थानीय गाइडों से पूरी रिपोर्ट जरूर लेनी चाहिए ताकि रास्ते में किसी अनचाही मुसीबत का सामना न करना पड़े।
दिन की रोशनी में आगे बढ़ना और सुरक्षित रास्तों का चयन बचा सकता है आपकी जान
पहाड़ों पर सफर करते वक्त समय का प्रबंधन सबसे बड़ी खूबी होती है। भुवन चौबे के अनुसार, ट्रेकर्स को हमेशा यह कोशिश करनी चाहिए कि वे दिन की रोशनी (Daylight) रहते ही अपने तय गंतव्य या सुरक्षित बेस कैंप तक पहुंच जाएं। सूरज ढलने के बाद पहाड़ों का तापमान अचानक बहुत तेजी से गिरता है और रास्ते भटकने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। केवल कुछ समय या दूरी बचाने के लिए शॉर्टकट अपनाना या किसी जोखिम भरे और अनजान रास्ते से आगे बढ़ना आपके लिए घातक साबित हो सकता है। मौसम बिगड़ने के संकेत मिलते ही तुरंत यात्रा रोक देनी चाहिए और किसी सुरक्षित चट्टान या कैंप की शरण लेनी चाहिए ताकि तेज हवाओं, भारी बर्फबारी या जानलेवा ठंड से बचा जा सके।
हिमस्खलन और खराब मौसम के संकेतों को न करें नजरअंदाज, जान है तो जहान है
पर्वतारोहण के दौरान कई बार ट्रेकर्स उत्साह में आकर चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो उनकी सबसे बड़ी भूल साबित होती है। यदि रास्ते में अचानक तेज हवाएं चलने लगें, मूसलाधार बारिश या बर्फबारी शुरू हो जाए, घना कोहरा छा जाए या किसी इलाके में हिमस्खलन (Avalanche) का खतरा दिखाई दे, तो अपनी जिद छोड़कर तुरंत यात्रा को टाल देना या वापस लौट जाना ही समझदारी है। पहाड़ों में रोमांच अपनी जगह है, लेकिन इंसान की सुरक्षा से बढ़कर कुछ भी नहीं हो सकता। अनुभवी पर्वतारोही भुवन चौबे की ये सीख उन तमाम युवाओं के लिए एक आईना है जो सोशल मीडिया पर रील्स या ग्लैमर के चक्कर में अपनी सुरक्षा से खिलवाड़ करते हैं। अगली बार जब भी आप हिमालय के आंचल में ट्रेकिंग के लिए निकलें, तो इन जरूरी सुरक्षा नियमों का पालन जरूर करें ताकि आपका सफर रोमांचक भी हो और पूरी तरह सुरक्षित भी।