Toxic Relationships : कहीं आप भी तो नहीं हैं नार्सिसिस्ट के शिकार? रिश्तों को दीमक की तरह चाट जाती हैं ये 5 आदतें

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News India Live, Digital Desk : आज के दौर में 'सेल्फ लव' और 'सेल्फ केयर' की बातें खूब होती हैं, जो कि अच्छी बात है। लेकिन जब खुद से प्यार करने की यह चाहत दूसरों की भावनाओं को कुचलने लगे, तो इसे नार्सिसिज्म (Narcissism) यानी आत्ममोह कहते हैं। एक नार्सिसिस्ट व्यक्ति वह होता है जो खुद को ब्रह्मांड का केंद्र समझता है और दूसरों को केवल अपने फायदे का जरिया।

ऐसे लोग रिश्तों में प्यार से ज्यादा कंट्रोल चाहते हैं। अगर आपको भी अपने पार्टनर या किसी करीबी के व्यवहार में ये 5 बदलाव नजर आ रहे हैं, तो संभल जाइए, क्योंकि यह रिश्ता आपको मानसिक रूप से खोखला कर सकता है।

1. खुद को सबसे ऊपर रखना (Self-Centeredness)

नार्सिसिस्ट इंसान की पहली और सबसे बड़ी पहचान यही है कि उसके लिए उसकी अपनी इच्छाएं और जरूरतें सर्वोपरि होती हैं। वह हर बातचीत और हर फैसले में खुद को सेंटर में रखता है। उसे इस बात की बिल्कुल परवाह नहीं होती कि उसके फैसलों का सामने वाले पर क्या असर पड़ेगा। धीरे-धीरे पार्टनर को यह महसूस होने लगता है कि इस रिश्ते में उसकी अपनी कोई पहचान या अहमियत बची ही नहीं है।

2. हर पल तारीफ की भूख (Craving for Validation)

नार्सिसिस्ट व्यक्ति को अटेंशन का नशा होता है। वह चाहता है कि लोग हर समय उसकी उपलब्धियों की तारीफ करें और उसे खास महसूस कराएं। चौंकाने वाली बात यह है कि वह खुद दूसरों के लिए कभी कुछ खास नहीं करता। अगर उसे उम्मीद के मुताबिक तारीफ या महत्व न मिले, तो वह चिड़चिड़ा हो जाता है और सामने वाले को गिल्ट (Guilt) महसूस कराने लगता है ताकि उसे फिर से अटेंशन मिल सके।

3. गलती कभी न मानना (Never Owning Mistakes)

एक नार्सिसिस्ट इंसान के शब्दकोश में 'सॉरी' शब्द नहीं होता। वह चाहे कितनी भी बड़ी गलती क्यों न कर दे, वह कभी जिम्मेदारी नहीं लेगा। वह बड़ी चतुराई से हालात को दोष देगा या फिर उल्टा आप पर ही आरोप मढ़ देगा। इससे रिश्ते में भरोसा टूटने लगता है क्योंकि पीड़ित व्यक्ति को लगने लगता है कि हर समस्या की जड़ वही है।

4. इमोशनल मैनिपुलेशन का जाल (Emotional Manipulation)

ऐसे लोग भावनाओं के साथ खेलना बखूबी जानते हैं। वे कभी बहुत ज्यादा प्यार दिखाकर तो कभी अचानक दूरी बनाकर आपको कंट्रोल करते हैं। इसे 'गैसलाइटिंग' भी कहा जाता है, जहां सामने वाला इतना कन्फ्यूज हो जाता है कि वह अपनी ही याददाश्त और सोच पर शक करने लगता है। यह स्थिति मानसिक रूप से थका देने वाली होती है और इंसान को डिप्रेशन की ओर धकेल सकती है।

5. हमदर्दी का पूरी तरह अभाव (Lack of Empathy)

रिश्ते की बुनियाद हमदर्दी यानी 'एम्पैथी' पर टिकी होती है, लेकिन नार्सिसिस्ट व्यक्ति में इसकी भारी कमी होती है। उसे आपके दर्द, आंसू या परेशानी से कोई फर्क नहीं पड़ता, बशर्ते उससे उसका कोई फायदा न जुड़ा हो। ऐसे रिश्तों में पार्टनर अक्सर अकेलापन महसूस करता है क्योंकि उसे अपनी तकलीफ बांटने के लिए कोई कंधा नहीं मिलता।

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