लाखों छात्रों के लिए मिसाल है यह अफसर ,IITian से PCS बनने तक अलंकार अग्निहोत्री ने कैसे की तैयारी
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश पीसीएस (PCS) अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री का नाम इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में भले ही कुछ विवादों को लेकर चर्चा में हो, लेकिन उनकी शैक्षिक और करियर की यात्रा किसी प्रेरणा से कम नहीं है। अलंकार अग्निहोत्री उन गिने-चुने अधिकारियों में से हैं जिन्होंने न केवल देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई की, बल्कि कॉर्पोरेट जगत की मोटी सैलरी छोड़कर सिविल सेवाओं की ओर रुख किया और पहली बार में ही सफलता हासिल कर ली।
आईआईटी, बीएचयू और कॉर्पोरेट करियर का सफ़र
अलंकार अग्निहोत्री की नींव बेहद मजबूत शैक्षणिक संस्थानों में पड़ी है। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जैसी कठिन परीक्षा पास की और इसके अलावा उनकी शिक्षा का जुड़ाव काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से भी रहा। IIT से इंजीनियरिंग करने के बाद उनके लिए देश और विदेश में बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों के दरवाजे खुले थे।
कॉर्पोरेट की चमक-धमक में उन्होंने काफी काम किया, जहाँ सैलरी लाखों में नहीं, बल्कि करोड़ों में होती है। लेकिन एक समय ऐसा आया जब उन्हें महसूस हुआ कि वे अपनी ऊर्जा और क्षमता का इस्तेमाल देश और समाज के लिए करना चाहते हैं। यहीं से उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट आया।
एक प्रयास, सीधी एसडीएम की कुर्सी
अलंकार अग्निहोत्री ने बड़ा फैसला लिया—कॉर्पोरेट करियर को छोड़कर प्रशासनिक सेवा की तैयारी करना। उन्होंने सिविल सेवाओं की चुनौतियों को समझा और अपने पहले ही प्रयास में PCS (प्रादेशिक सिविल सेवा) की परीक्षा पास कर ली।
पहले ही प्रयास में इस प्रतिष्ठित परीक्षा को पास करके उन्होंने एसडीएम (SDM) का पद हासिल किया। यह दिखाता है कि जब कोई व्यक्ति आईआईटी जैसे मुश्किल संस्थान की पढ़ाई को क्रैक करने का आत्मविश्वास रखता है, तो वह सिविल सेवाओं में भी अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जी-जान लगा देता है।
सालों बाद भी मिसाल बनी कामयाबी
IITian से SDM बनने तक का अलंकार अग्निहोत्री का सफर लाखों युवाओं को प्रेरित करता है। यह उन सभी छात्रों के लिए एक प्रेरणा है जो किसी हाई-प्रोफाइल प्राइवेट जॉब को छोड़कर सामाजिक सेवा में जाना चाहते हैं। यह यात्रा सिखाती है कि किसी भी चुनौती के सामने झुकने की बजाय अपने चुने हुए रास्तों पर डटकर चला जाए, तो सफलता निश्चित तौर पर मिलती है, भले ही इसके बाद प्रशासनिक जीवन में उन्हें उतार-चढ़ाव देखने पड़े हों।