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April 17 2026 07:09 pm

PhD के नियम बदलेंगे, तो फीस क्यों बढ़ेगी? छात्रों के बड़े विरोध प्रदर्शन से पहले UGC मुख्यालय को बनाया गया छावनी

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News India Live, Digital Desk : देश की उच्च शिक्षा (Higher Education) नीति बनाने वाली सबसे बड़ी संस्था, यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC), इन दिनों छात्रों के भारी विरोध का सामना कर रही है। यूजीसी द्वारा लाए गए कुछ नए नियमों को लेकर छात्र सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं, जिससे राजधानी दिल्ली में तनाव बढ़ गया है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए, दिल्ली पुलिस ने UGC मुख्यालय और उसके आसपास के इलाके की सुरक्षा सख्त कर दी है।

छात्रों का गुस्सा क्यों भड़का है?

छात्र संगठनों का मानना है कि यूजीसी द्वारा लाए गए कई बदलाव, खासकर PhD एडमिशन नियम से जुड़े, उच्च शिक्षा को महंगा और सामान्य पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए मुश्किल बना देंगे। जिन मुख्य मुद्दों पर छात्रों का विरोध है, वे हैं:

  1. जटिलता और अपारदर्शिता: 4-वर्षीय स्नातक छात्रों को सीधे पीएचडी में दाखिला देने, और 3 साल वाले छात्रों के लिए अलग पात्रता रखने जैसे नियमों से एडमिशन प्रक्रिया जटिल हो जाएगी। विरोधियों को लगता है कि 70:30 (लिखित परीक्षा: इंटरव्यू) का अनुपात भेदभाव को बढ़ा सकता है।
  2. शिक्षण पर असर: उनका कहना है कि ये नियम गुणवत्तापूर्ण रिसर्च को प्रोत्साहित नहीं करते, बल्कि इसे केवल कागज़ों तक सीमित कर देंगे।

मुख्यालय के बाहर कड़ा सुरक्षा घेरा

मिली जानकारी के अनुसार, विभिन्न छात्र संगठन UGC मुख्यालय (दिल्ली) के सामने विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना रहे थे। छात्रों की संभावित बड़ी भीड़ को देखते हुए, दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों को अलर्ट कर दिया गया है।

यूजीसी दफ्तर के बाहर भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी प्रदर्शनकारी जबरन परिसर में प्रवेश न करे और राजधानी में शांति भंग न हो। सड़कों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और आने-जाने वालों की सघन जांच की जा रही है। एक तरह से, यूजीसी मुख्यालय के आसपास का पूरा इलाका फिलहाल एक सुरक्षा छावनी जैसा दिख रहा है।

छात्रों की मांग सीधी है: वे चाहते हैं कि यूजीसी बिना किसी बहस के इन विवादित नियमों को वापस ले और छात्रों एवं शिक्षकों के हित को ध्यान में रखते हुए ही कोई नई गाइडलाइन जारी करे। यह विरोध इस बात का संकेत है कि अगर ये नियम लागू होते हैं, तो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आने वाले दिनों में और बड़ा टकराव देखने को मिल सकता है।