ये सिर्फ़ सर्दी-ज़ुकाम नहीं... अगर आपके बच्चे में दिख रहे हैं ये लक्षण, तो हो जाएं सावधान

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Flu Symptoms in Children Under 5 : मौसम की हल्की-सी करवट... और घर में किसी छोटे बच्चे की नाक बहनी या खांसने की आवाज़. हर माँ-बाप के लिए ये मौसम चिंता लेकर आता है. हल्की ठंडक शुरू होते ही अस्पतालों में बच्चों की भीड़ लग जाती है. ख़ासकर 5 साल से छोटे बच्चे, जिनकी इम्यूनिटी यानी बीमारियों से लड़ने की ताक़त अभी बन ही रही होती है, वे सबसे पहले इसकी चपेट में आते हैं.

लेकिन इस बार का फ़्लू थोड़ा अलग और ज़्यादा परेशान करने वाला है. यह सिर्फ़ সাধারণ सर्दी-खांसी नहीं है. डॉक्टरों का कहना है कि इस बार बच्चों में कुछ ऐसे लक्षण दिख रहे हैं, जिन्हें हल्के में लेने की ग़लती बिलकुल नहीं करनी चाहिए.

इस बार फ़्लू के नए लक्षण क्या हैं?

पहले फ़्लू का मतलब होता था तेज़ बुख़ार, खांसी, ज़ुकाम और बदन दर्द. ये लक्षण तो इस बार भी हैं, लेकिन इनके साथ-साथ कुछ नई परेशानियां भी जुड़ गई हैं:

  • पेट में तेज़ दर्द: कई बच्चे पेट में ऐंठन और तेज़ दर्द की शिकायत कर रहे हैं.
  • उल्टी और दस्त: बुख़ार के साथ-साथ उल्टी और दस्त लगना इस बार बहुत आम हो गया है, जिससे बच्चे बहुत ज़्यादा कमज़ोर हो रहे हैं.
  • खाना-पीना छोड़ देना: बच्चे बीमारी में इतना असहज महसूस कर रहे हैं कि वे अपनी पसंदीदा चीज़ें भी खाने से मना कर रहे हैं.
  • बहुत ज़्यादा चिड़चिड़ापन: दर्द और कमज़ोरी की वजह से बच्चे लगातार रो रहे हैं और बहुत चिड़चिड़े हो गए हैं.

क्यों हो रहा है ऐसा?

डॉक्टरों के मुताबिक, यह इन्फ्लूएंजा वायरस का ही एक रूप है, जैसे H3N2 या कोई और वायरल स्ट्रेन. ये वायरस सीधे बच्चे के श्वसन तंत्र (respiratory system) पर हमला करते हैं, लेकिन इस बार इसका असर पाचन तंत्र पर भी दिख रहा है.

तो एक माँ-बाप के तौर पर आपको क्या करना चाहिए?

घबराने से ज़्यादा ज़रूरत है समझदारी और सावधानी की.

  1. सबसे बड़ा हथियार - हाइड्रेशन: जब बच्चे को उल्टी या दस्त हों, तो शरीर में पानी की कमी होने का ख़तरा सबसे ज़्यादा होता है. उसे लगातार थोड़ा-थोड़ा पानी, नारियल पानी, फलों का जूस या ओआरएस (ORS) का घोल पिलाते रहें.
  2. दवाओं के डॉक्टर ख़ुद न बनें: यह सबसे ज़रूरी बात है. बच्चे को ख़ुद से कोई भी एंटीबायोटिक या कोई और दवा देना ख़तरनाक हो सकता है. हमेशा डॉक्टर की सलाह के बाद ही कोई दवा दें.
  3. खाने में ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं: इस समय बच्चे की भूख मर जाती है. उसे ज़बरदस्ती खिलाने की बजाय, थोड़ी-थोड़ी देर में हल्का और पौष्टिक खाना दें, जैसे फलों की प्यूरी, दाल का पानी या खिचड़ी.
  4. आराम, आराम, और सिर्फ़ आराम: किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए शरीर को आराम की सख़्त ज़रूरत होती है. बच्चे को ज़्यादा से ज़्यादा आराम करने दें.
  5. साफ़-सफ़ाई का रखें ख़ास ख़याल: बच्चे को छूने से पहले और बाद में अपने हाथ अच्छे से धोएं. उसे भी हाथ धोने की आदत डालें.

कब डॉक्टर के पास भागना है ज़रूरी?

अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो घरेलू इलाज़ के भरोसे न बैठें और तुरंत बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाएं:

  • अगर बुख़ार 102 डिग्री से ऊपर चला जाए.
  • बच्चा बहुत ज़्यादा सुस्त हो जाए और खेले-कूदे नहीं.
  • उसे सांस लेने में तकलीफ़ हो या उसकी पसलियाँ तेज़ी से चल रही हों.
  • वह कुछ भी खा-पी नहीं रहा हो.

थोड़ी-सी सावधानी और सही समय पर डॉक्टर की सलाह, और आपका बच्चा जल्द ही दोबारा घर में अपनी हँसी से रौनक भर देगा.