YouTube Shorts की दुनिया में बच्चा कहीं खो न जाए, ये पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स हैं आज की सबसे बड़ी ज़रूरत

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News India Live, Digital Desk : आजकल हर घर की एक ही कहानी है जैसे ही हाथ में मोबाइल आता है, बच्चा YouTube Shorts की ऐसी दुनिया में खो जाता है जहाँ उसे समय का पता ही नहीं चलता। अंगूठा बस ऊपर की तरफ स्लाइड होता रहता है और रील खत्म होने का नाम नहीं लेतीं। हम माता-पिता परेशान होकर या तो फ़ोन छीनते हैं या डांटते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि YouTube ने हमारी इस मुश्किल को आसान करने के लिए कुछ बहुत ही खास पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स (Parental Control Features) दिए हैं?

जी हाँ, अब आपको पहरेदार बनने की ज़रूरत नहीं है। चलिए एकदम सरल शब्दों में समझते हैं कि ये फीचर्स क्यों इतने खास हैं और आप अपने बच्चे का स्क्रीन टाइम कैसे कंट्रोल कर सकते हैं।

ये फीचर्स क्यों ज़रूरी और 'स्पेशल' हैं?
YouTube का 'सुपरवाइज्ड एक्सपीरियंस' (Supervised Experience) इसलिए खास है क्योंकि यह केवल कंटेंट ब्लॉक नहीं करता, बल्कि बच्चे के उम्र के हिसाब से फिल्टर लगाता है। मान लीजिये आपका बच्चा 8 साल का है या 13 साल का, तो YouTube उसी हिसाब से वीडियो परोसेगा।

इसमें सबसे मज़ेदार ये है कि आप खुद तय कर सकते हैं कि वो केवल शिक्षाप्रद वीडियो देखेगा या हल्के-फुल्के एंटरटेनमेंट वाले। यह बच्चे की जिज्ञासा और सुरक्षा के बीच एक सही संतुलन बनाता है।

कैसे करें कंट्रोल? (आसान तरीका)

  1. टेक ए ब्रेक (Take a Break): अक्सर बच्चे को खुद याद नहीं रहता कि वो घंटों से फ़ोन लेकर बैठा है। आप सेटिंग्स में जाकर 15 या 30 मिनट का 'Break Reminder' लगा सकते हैं। जैसे ही समय पूरा होगा, स्क्रीन पर एक मज़ेदार संदेश आएगा जो बच्चे को फ़ोन छोड़ने की याद दिलाएगा।
  2. बैड टाइम रिमाइंडर (Bedtime Reminder): अगर आपका बच्चा देर रात तक वीडियो देखता है, तो आप एक सोने का समय फिक्स कर सकते हैं। इसके बाद फ़ोन की आवाज़ या वीडियो प्ले होना बंद हो जाएगा, जिससे उसकी नींद ख़राब नहीं होगी।
  3. कंटेंट फिल्टरिंग: अपनी सेटिंग्स में जाकर आप 3 तरह के लेवल चुन सकते हैं: Explore, Explore More, या Most of YouTube। छोटे बच्चों के लिए 'Explore' सबसे सुरक्षित रहता है।
  4. स्क्रीन टाइम लिमिट: आप अपने खुद के फ़ोन से बच्चे के 'सुपरवाइज्ड अकाउंट' की पूरी निगरानी कर सकते हैं और एक निश्चित समय के बाद वीडियो को लॉक कर सकते हैं।

एक छोटी सी सलाह
दोस्तों, सिर्फ टेक्नोलॉजी पर भरोसा करना काफी नहीं है। जब भी आप इन सेटिंग्स को ऑन करें, तो अपने बच्चे से बात करें। उन्हें समझाएं कि आप उन्हें वीडियो देखने से मना नहीं कर रहे, बल्कि उनके समय और आंखों का ख्याल रख रहे हैं। जब हम प्यार से बात करते हैं, तो बच्चे फ़ोन छीनने पर जितना गुस्सा करते हैं, उतना नियमों के पालन में नहीं करेंगे।

टेक्नोलॉजी को अपने बच्चे का दुश्मन नहीं, दोस्त बनने दीजिये। आज ही इन सेटिंग्स को चेक करें और चैन की सांस लें!

आपको ये जानकारी कैसी लगी? क्या आपके घर में भी बच्चे शॉर्ट्स की लत का शिकार हैं? हमें कमेंट्स में अपनी परेशानी या सुझाव ज़रूर बताएं।