देश के बजट का शक्ति केंद्र नॉर्थ ब्लॉक, मिंटो रोड और राष्ट्रपति भवन का वो राज जो सबको नहीं पता

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News India Live, Digital Desk : हर साल फरवरी के आस-पास टीवी पर बजट की खबरें आने लगती हैं। हम और आप सिर्फ स्क्रीन पर वित्त मंत्री (Finance Minister) को एक बैग के साथ देखते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उस एक बैग के पीछे दिल्ली की तीन जगहों नॉर्थ ब्लॉक, मिंटो रोड और राष्ट्रपति भवन पर बजट से हफ़्तों पहले से ही भारी हलचल क्यों मच जाती है?

इन इमारतों की दीवारों में कई ऐसे राज कैद हैं, जिनसे देश का भविष्य तय होता है। चलिए, आज इन ठिकानों के पीछे का 'इंसाइडर सच' जानते हैं, वह भी बहुत ही सादे अंदाज़ में।

1. नॉर्थ ब्लॉक: जहाँ 'दिमाग' लगाया जाता है
नॉर्थ ब्लॉक असल में वित्त मंत्रालय का घर है। इसे बजट का 'ब्रेन सेंटर' कहा जा सकता है। बजट पेश होने से लगभग 10-15 दिन पहले, यहाँ की सुरक्षा ऐसी होती है जैसे किसी बड़े युद्ध की तैयारी हो रही हो। यहाँ का सबसे मशहूर हिस्सा है 'हलवा सेरेमनी'। हलवा बँटने के बाद मंत्रालय के कई बड़े अफसर बाहरी दुनिया से कट जाते हैं। न मोबाइल, न इंटरनेट, और न ही घर जाना! जब तक बजट पेश न हो जाए, ये लोग अंदर ही कैद रहते हैं ताकि एक भी आंकड़ा बाहर लीक न हो।

2. मिंटो रोड: जहाँ 'गोपनीयता' की छपाई होती है
आप सोच रहे होंगे कि अब तो सब डिजिटल है, टेबलेट से बजट पढ़ा जाता है, तो छपाई की क्या ज़रूरत? लेकिन सच तो यह है कि कागज़ की अपनी अहमियत है। मिंटो रोड पर भारत सरकार का प्रेस (Government Press) स्थित है। सालों तक यहीं बजट की कॉपियां बहुत ही सख्त सुरक्षा के बीच छापी जाती रही हैं। यहाँ काम करने वाले लोगों पर इतनी कड़ी निगरानी होती है कि वे अपने परिवार से भी बात नहीं कर सकते। हालांकि अब प्रक्रिया काफी हाई-टेक हो गई है, पर सुरक्षा का स्तर आज भी वही है।

3. राष्ट्रपति भवन: जहाँ 'मंजूरी' का मोहर लगता है
बजट का दिन शुरू ही राष्ट्रपति भवन से होता है। संविधान के हिसाब से, वित्त मंत्री बजट को संसद में रखने से पहले देश के प्रथम नागरिक यानी राष्ट्रपति से मिलने जाते हैं। यह महज़ एक शिष्टाचार नहीं, बल्कि एक संवैधानिक मज़बूरी और सम्मान है। जब तक राष्ट्रपति 'हरी झंडी' नहीं देते, तब तक वित्त मंत्री संसद में बजट की एक लाइन भी नहीं पढ़ सकते। वहां से मिलने वाला 'ग्रीन सिग्नल' ही बजट को असली ताकत देता है।

अंत में मेरी राय
दोस्तों, बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, यह एक परंपरा है जिसे आज़ादी के बाद से संजोया गया है। अगली बार जब आप टीवी पर बजट की खबर देखें, तो समझ जाइएगा कि उस लाल रंग के बैग को संसद तक पहुँचाने में नॉर्थ ब्लॉक के अफसरों की नींद, मिंटो रोड के प्रेस की गोपनीयता और राष्ट्रपति भवन की गरिमा का कितना बड़ा हाथ है।

क्या आपको पहले इन ऐतिहासिक जगहों की अहमियत पता थी? बजट की इन तीन 'धड़कनों' में से आपको सबसे ज्यादा रोमांचक क्या लगा? कमेंट में हमारे साथ ज़रूर साझा करें!