तिवारी और विभूति के चक्कर में मर्यादा तो नहीं भूल गए मेकर्स? फिल्म फन ऑन द रन के ट्रेलर ने मचाया बवाल
News India Live, Digital Desk: हम सबने पिछले कई सालों से 'भाबी जी घर पर हैं' को अपने घरों के ड्राइंग रूम में बैठकर देखा है। कानपुर की वो अतरंगी गलियां, तिवारी जी का अंगूरी भाभी से वो मासूम प्यार और विभूति जी का अनीता भाभी से छुपकर दूसरी ओर झांकना यह शो हमेशा से हंसी-मज़ाक के लिए जाना जाता रहा है।
लेकिन, अब खबर आई है कि यह शो केवल टीवी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका एक बड़ा वर्जन 'भाबी जी घर पर हैं: फन ऑन द रन' (Fun On The Run) फिल्म के रूप में आने वाला है। हाल ही में इसका ट्रेलर रिलीज हुआ, जिसे देख कुछ लोग तो खुशी से उछल पड़े हैं, तो कुछ लोग अपनी आंखें सिकोड़ रहे हैं।
क्यों मचा है इंटरनेट पर इतना शोर?
दिक्कत 'हंसी' से नहीं, बल्कि हंसी के पीछे छिपे 'शब्दों' से है। जो लोग इस शो को शुरुआत से देख रहे हैं, उन्हें पता है कि यहाँ थोड़ा-बहुत 'नटखटपन' या डबल मीनिंग (Double Meaning) ह्यूमर तो हमेशा से रहा है। पर इस बार फिल्म के ट्रेलर को देख कर बहुत से फैन्स को ऐसा लग रहा है कि मेकर्स ने हंसाने के चक्कर में बोल्डनेस या अभद्र भाषा (Vulgarity) का सहारा ज़्यादा लिया है।
वही किरदार, पर अंदाज़ कितना नया?
ट्रेलर में हमारे प्यारे मनमोहन तिवारी और विभूति नारायण मिश्रा बिल्कुल वैसे ही नज़र आ रहे हैं, जैसे हम उन्हें पसंद करते हैं। लेकिन ट्रेलर के कुछ संवाद या कहें तो 'डायलॉग' सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए हैं। कुछ फैन्स का मानना है कि जो शो हम अपनी फैमिली और बच्चों के साथ टीवी पर आराम से देखते थे, उसे फिल्म बनाने के चक्कर में शायद 'एडल्ट' रंग देने की कोशिश की गई है।
हंसी और मर्यादा के बीच का वो महीन धागा
यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई है। कोई कह रहा है कि 'भाबीजी की जान' वही कॉमेडी है जिसे तिवारी और विभूति निभाते हैं, और ओटीटी (OTT) या फिल्म की छूट का फायदा तो मिलना ही चाहिए। वहीं, दूसरा गुट ये कह रहा है कि फूहड़ता (Vulgarity) और कॉमेडी के बीच एक लाइन होनी चाहिए, जिसे शायद ट्रेलर में पार कर दिया गया है।
अंत में मेरी राय...
ट्रेलर केवल एक छोटी सी झलक होता है। अक्सर सुर्खियां बटोरने के लिए ट्रेलर्स को थोड़ा मसालेदार बनाया जाता है। अब यह फिल्म वास्तव में वैसी ही है जैसा ट्रेलर में दिखाया गया है, या फिर यह महज़ एक प्रोमोशनल हथकंडा यह तो फिल्म रिलीज होने पर ही पता चलेगा।
पर इतना तय है कि तिवारी जी और विभूति जी के अतरंगी फन को लेकर एक बार फिर पूरा भारत दो धड़ों में बंट गया है।
आप इस ट्रेलर को लेकर क्या सोचते हैं? क्या भाबीजी की इस कॉमेडी को फिल्म के बहाने थोड़ा 'एक्स्ट्रा मसालेदार' बनाना सही है या इसका ओरिजिनल सादगी वाला मज़ा ही कुछ और था? कमेंट्स में अपनी राय ज़रूर दें!