मुश्किलों का होगा अंत जीवन की हर समस्या के लिए रामबाण हैं ये 5 चालीसा और स्रोत, जानें किसे कब पढ़ें?
News India Live, Digital Desk : सनातन धर्म में मंत्रों और स्तोत्रों की शक्ति को अद्वितीय माना गया है। अक्सर हम जीवन की आपाधापी और परेशानियों में घिर जाते हैं, लेकिन हमारे शास्त्रों में हर समस्या का समाधान 'पाठ' और 'चालीसा' के रूप में मौजूद है। चाहे वह आर्थिक तंगी हो, स्वास्थ्य की चिंता या फिर मानसिक अशांति सही समय पर किया गया सही पाठ आपकी किस्मत बदल सकता है।
1. आर्थिक तंगी और कर्ज से मुक्ति के लिए
अगर आप लंबे समय से धन के अभाव या कर्ज के बोझ से दबे हैं, तो 'श्री कनकधारा स्तोत्र' या 'महालक्ष्मी चालीसा' का पाठ अचूक माना जाता है।
कब करें: शुक्रवार के दिन सुबह स्नान के बाद माँ लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाकर करें।
लाभ: रुके हुए धन की प्राप्ति और आय के नए स्रोत बनते हैं।
2. रोगों से मुक्ति और उत्तम स्वास्थ्य के लिए
यदि घर में कोई सदस्य बीमार रहता है या आपको अज्ञात भय सताता है, तो 'हनुमान बाहुक' या 'राम रक्षा स्तोत्र' का पाठ करना चाहिए।
कब करें: मंगलवार या शनिवार को हनुमान जी की प्रतिमा के सामने बैठकर।
लाभ: शारीरिक कष्टों का निवारण होता है और आत्मबल बढ़ता है।
3. करियर और सफलता में बाधा के लिए
नौकरी या व्यापार में लगातार असफलता मिल रही हो, तो 'श्री गणेश चालीसा' और 'संकटनाशन गणेश स्तोत्र' का पाठ करना लाभकारी है।
कब करें: बुधवार को भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करते हुए।
लाभ: कार्यों में आने वाली विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और बुद्धि प्रखर होती है।
4. शनि दोष और गृह क्लेश के निवारण के लिए
शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या घर में क्लेश की स्थिति में 'शनि चालीसा' और 'बजरंग बाण' का पाठ करना चाहिए।
कब करें: शनिवार की शाम पीपल के पेड़ के नीचे दीया जलाकर।
लाभ: शत्रुओं पर विजय मिलती है और घर में सुख-शांति का वास होता है।
5. मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए
तनावपूर्ण जीवन में शांति के लिए 'शिव चालीसा' का पाठ सर्वोत्तम है।
कब करें: प्रतिदिन सुबह या सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए।
लाभ: मन को स्थिरता मिलती है और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
विशेष टिप: कोई भी पाठ करते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास होना आवश्यक है। बिना एकाग्रता के किया गया पाठ पूर्ण फलदायी नहीं होता।